– मीरा स्मारक के 17वें स्थापना दिवस के दूसरे दिन भजन गायक ओ.एस. अरूण, सुनंदा शर्मा ने दी प्रस्तुतियां
मेड़ता सिटी. मीरा स्मारक के 17वें स्थापना दिवस पर आयोजित 2 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन अवसर पर शनिवार शाम यहां पैनोरमा परिसर में भजन गायकों के भजनों ने समां बांध दिया। कर्नाटक शास्त्री संगीत के गायक ओ.एस अरुण और दिल्ली की गायिका सुनंदा शर्मा ने अलग अंदाज में मां मीरा के भजन प्रस्तुत कर मेड़ता के श्रोताओं को भक्ति के रस में डूबा दिया।
दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारम्भ राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत, उपखंड अधिकारी पूनम चोयल, बीरमदेवसिंहजैसास ने भजन गायक ओ.एस.अरूण के साथ मां मीरा की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। जिसके बाद कार्यक्रम की शुरूआत संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के भजन गायक अरुण ने अपने टीम के बांसुरी वादक जी.रघुरामन, एम.वी चंद्रशेखर, तबला वादक शंभुनाथ भटाचार्य, तालम भरणी कुमार के साथ की। इस दौरान भजन गायक अरुण ने “मोहन गिरवरधारी, मनमोहन गिरवरधारी…मोर मुकुट पिताम्बरधारी’, “मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आज आई जी हमारी बेरी…’, “माई रे मैं तो गोपाल लीनाे, लियो बजंता ढोल…’, “मेरेनयनेन में बसो नंदलाला…’, “पायो जी मैंने रामरतन धन पायो…’ सहित मां मीरा के भजनों की प्रस्तुतियां देकर खूब दाद बटोरी। मंच का संचालन अनिल चौधरी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चे मौजूद रहे।
“पग घुंघरू बांध मीरा नाचे रे…’
कार्यक्रम के दौरान स्वर्ण पदक सम्मानित गायिक सुनंदा शर्मा दिल्ली ने अपनी टीम के तबला वादक पंडित विनोद, हारमोनियम वादक पंडित धर्मनाथ मिश्रा, सारंगी वादक विनायक सहाय के साथ मां मीरा के एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां दी। गायिका शर्मा ने “पग घुंघरू बांध मीरा नाचे रे…’ सरीखे भजनों से शहर के श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।