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वीडियो : नागौर के डॉ. प्रहलाद फरड़ौदा बने सर्वश्रेष्ठ एशियन बिजनसमैन, इंग्लैंड में मिला अवार्ड

जिले के फरडोद गांव के किसान परिवार में जन्मे डॉ. प्रहलाद फरड़ौदा होटल व्यवसाय में कमा रहे नाम

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नागौर. नागौर जिले के छोटे से गांव फरडोद के एक किसान परिवार में जन्में डॉ. प्रहलाद फरडौदा को लंदन (यूके) में सर्वश्रेष्ठ एशियन बिजनसमैन अवार्ड से नवाजा गया है। डॉ. फरडौदा को इंग्लैंड में 2 दिसम्बर को आयोजित समारोह में फूड एंड रेस्टोरेंट के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ एशियन एंटरप्रेन्योर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। डॉ. फरड़ौदा ने देश ही नहीं पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई है। इससे पहले उनकी ओर से शिक्षा व समाजसेवा के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ब्रिटिश संसद, हाउस ऑफ कॉमन्स और हाल ही में नई दिल्ली में जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से सामुदायिक और सामाजिक सेवाओं के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

गौरतलब है कि डॉ. प्रहलादराम फरड़ोदा ने छोटी उम्र से ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली और अपने परिवार और समुदाय का समर्थन करने के लिए अथक परिश्रम किया। एक अग्रणी के रूप में, वे यूक्रेन से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने के लिए शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले अपने क्षेत्र के पहले व्यक्ति बने। उनकी यात्रा ने कई लोगों को अपने सपनों को पूरा करने और सीमाओं से परे अवसरों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया। चिकित्सा पृष्ठभूमि से होने के बावजूद डॉ. फरड़ौदा ने होटल व्यवसाय में भाग्य आजमाया और आज लंदन के गिने-चुने होटल व्यवसायियों में शामिल हो गए हैं। यह उनके अपने नेतृत्व और उद्यमशीलता कौशल का परिणाम है।

खेलों से भी रखते हैं जुड़ाव

डॉ. फरड़ौदा खेलों से जुड़े हुए हैं, जो खेलों के साथ सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं। वे वर्तमान में इंग्लैंड के खो-खो महासंघ के अध्यक्ष के भी हैं। एक समर्पित समाजसेवी के रूप में वे विश्व हिंदू केंद्र मंदिर, साउथॉल के ट्रस्टी के रूप में कार्य कर रहे हैं और राजस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, यूके के संरक्षक हैं, जिसने भारत में बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण धनराशि दान की है।

गांव व देश में कर रहे समाजसेवा

– डॉ. फरड़ौदा ने स्थानीय फुटबॉल टीम का समर्थन करने के लिए भूमि दान करना और कमरे बनवाने में सहयोग दिया।

– भारत में कई धार्मिक मंदिरों के निर्माण में योगदान दिया।

– अपनी ज़मीन पर लावारिस गोवंश के लिए गोशाला बनवाई।