नागौर. राजस्थान सरकार के साथ केन्द्र सरकार भी इस बार पौधरोपण पर पूरा जोर दे रही है। इसको लेकर ‘एकपेड़ खुद के नाम’, ‘एकपेड़ मां के नाम’ व ‘एकपेड़ देश नाम’ अभियान चलाए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मेहनत करके लाखों रुपए खर्च करके पौधे तैयार किए, ताकि मानसून के सीजन में सरकारी विभागों एवं आमजन को वितरित किए जा सकें। इस बार सरकार के निर्देश पर जिला कलक्टर ने भी विभागवार पौधरोपण का लक्ष्य तय किया, ताकि अधिक से अधिक पौधे लगाए जा सके। कलक्टर ने सरकारी विभागों को केवल पौधे लगाने की जिम्मेदारी नहीं दी, बल्कि उनकी सुरक्षा और पानी देने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। इसके बावजूद कुछ विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने कलक्टर के निर्देशों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दिया। ऐसा ही किया गया है सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से। विभाग की ओर से हवाई पट्टी पर किए गए पौधरोपण में लापरवाही की सारी हदें पार कर दी। जिन्होंने भी यहां पौधे लगाए, उन्होंने न तो पौधों की थैलियां हटाई और न ही सुरक्षा की व्यवस्था की। आधे-अधूरे गड्ढ़े खोदकर थैलियों समेत पौधे रख दिए। थैली को आधा मिट्टी में दबाया और आधा बाहर छोड़ दिया। सुरक्षा के लिए न तो ट्री गार्ड लगाए और न ही कांटे, इसके कारण जानवर पौधों को खा गए। दो-चार पौधे जीवित भी रहते, लेकिन पानी भी नहीं दिया।
पौधों की कीमत नहीं समझ रहे जिम्मेदार
आज मुझे जानकारी मिली तो मैं हवाई पट्टी पहुंचा, जहां पौधों की हालत देखकर रोना आ गया। यहां पर जिन्होंने भी पौधे लगाने की औपचारिकता निभाई है, वह किसी पाप से कम नहीं है। इन पौधों की न तो थैलियां हटाई गई और न ही सुरक्षा की। पानी देना तो दूर। यदि सरकारी विभाग ही इस प्रकार कार्य करेंगे तो दूसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है। यह तो आंखों में धूल झांकने वाली बात हो गई। एक पौधे की कीमत बाजार में 50 रुपए से कम नहीं है, यहां 100 पौधों का नाश किया गया है। इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
– पद्मश्री हिम्मताराम भांभू, पर्यावरण प्रेमी, नागौर