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नागौर
VIDEO…भक्तों की पुकार यहां खुद सुनते हैं कान्हा, और भक्त भी दूरदराज से आते हंै अपने भगवान से मिलने
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VIDEO…भक्तों की पुकार यहां खुद सुनते हैं कान्हा, और भक्त भी दूरदराज से आते हंै अपने भगवान से मिलने

नागौर. शहर में नगर सेठ भगवान श्रीकृष्ण के बंशीवाला मंदिर एक हजार साल पुराना बताया जाता है। मंदिर में वर्ष 1970 से लगातार बराह अवतार का उत्सव मनाया जाता है। जो यहां का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। कांच एवं शीशे पर नक्कासीदार की चित्रकारी के साथ मंदिर में लटकती झालरें निर्माण शैली की विशेषताओं को दर्शाती हुई नजर आती है। मंदिर में मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर ही एक दिव्य शक्ति का आभास श्रद्धालुओं को होता है। बताते हैं कि वर्ष 1290 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
मंदिर में रहता है उत्सव का माहौल
बशीवाला मंदिर में पूरे दिन तक उत्सव का माहौल रहता है। यहां जन्माष्टमी, दीपावली, कार्तिक स्नान आदि उत्सव मनाए जाते हैं। मंदिर में जिले सहित राजस्थान के अन्य राज्यों से भी लोग दर्शनार्थ पहुंचते हैं। मंदिर में मेले के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु किशोर, शंकरराम, दिनेश, रमेश का कहना है कि है कि वह बरसों से इस मंदिर में आ रहे हैं। हर मुसीबत से कान्हा ही बचाते हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण लोगों की प्रार्थना खुद सुनकर उनका उद्धार करते हैं। मंदिर में भगवान को प्रतिदिन सुबह बजे मंगला आरती, सात बजे माखन घोग, नौ बजे दूध का भोग व साढ़े 11 बजे प्रसाद चढ़ाया जाता है।
मंदिर का इतिहास तो अंकित है, लेकिन पढऩा मुश्किल
इसका विवरण मंदिर में लगे शिलापट पर मारवाड़ी, संस्कृत व अन्य भाषा में अंकित है। शिलापट्ट को भाष अभी तक पडऩे में नहीं जा सकने के कारण मंदिर की प्राचीनता के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती है।

मंदिर में है स्वप्रकट शिवलिंग
मंदिर परिसर में ही करीब तीस से पैतीस फीट नीचे पातालेश्वर महादेव लिंग रूप में स्थापित हैं। इसकी भी बहुत ज्यादा मान्यता है। बताते हैं कि पहले यहां पर स्वत: जल निकलता था। इससे भगवान का अभिषेक हो जाता था। अब करीब डेढ़ साल से अचानक पानी का निकलना बंद हो गया है।