नागौर. पारदर्शी एवं संवेदनशील वातावरण में आमजन की परिवेदनाओं एवं समस्याओं की सुनवाई करके उन्हें त्वरित राहत देने के लिए पिछले लम्बे समय से की जा रही जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। चाहे ग्राम पंचायत स्तर की जनसुनवाई हो या फिर जिला स्तरीय। अधिकारी, जनसमस्याएं सुनने के बाद अपने अधीनस्थ को निर्देश देकर इतिश्री कर लेते हैं, लेकिन निर्देशों की पालना नहीं होने पर संबंधित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जिसके कारण परिवादी बार-बार चक्कर काट रहे हैं। हर महीने के तीसरे गुरुवार को होने वाली जिला स्तरीय जनसुनवाई में कई परिवादी ऐसे हैं, जो कई सालों से अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ है। गांव के भोले-भाले लोग ज्ञापन की कॉपी पकड़ाकर चले जाते हैं, जबकि पढ़े-लिखे लोग अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते भी हैं, लेकिन अधिकारी चिकने घड़े बन चुके हैं।
केस एक – पांचाराम की पीड़ा
मेड़ता तहसील क्षेत्र के आकेली-ए निवासी पांचाराम व उसकी 80 वर्षीय मां सायरीदेवी पिछले दो साल से अतिक्रमण के नाम पर नियम विरुद्ध तोड़े गए बाड़े व खेत की मेड़ को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रहे हैं। साथ ही उसके व पड़ौसी के खेत का नाप करवाकर सही जगह रास्ता निकालने व जब्त किए गए सामान को वापस दिलाने की मांग को लेकर मेड़ता से लेकर जयपुर तक दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला है। खास बात यह है कि पांचाराम के मामले में अजमेर संभागीय आयुक्त सहित मेड़ता एसडीएम भी तहसीलदार की कार्रवाई को अनुचित बता चुके हैं।
केस दो – पन्नालाल की शिकायत
नागौर शहर के खोड़ों का मोहल्ले में रहने वाले पन्नालाल सांखला ने पिछले पांच साल में कई बार अधिकारियों को शिकायत पेश कर बताया कि हरिमा में अतिक्रमण के नाम पर तोड़े गए उसके धर्मकांटे की कार्रवाई अनुचित थी। खुद अधिकारियों ने कभी खसरा नम्बर 96 पर अतिक्रमण बताया तो कभी खसरा नम्बर 76 पर, जबकि उसका धर्म कांटा खसरा नम्बर 94 पर था। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने वीडियोग्राफी करवाई, लेकिन जब उसने सूचना का अधिकार के तहत सीडी मांगी तो उपलब्ध नहीं होने की बात कह रहे हैं।ऐसे में पन्नालाल संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
केस तीन – पार्षद कड़वा ने सुनाई कड़वी बातें
शहर के वार्ड संख्या एक के पार्षद गोविन्दकड़वा पिछले काफी समय से वार्ड की समस्याओं को लेकर जिला स्तरीय जनसुनवाई के साथ मुख्यमंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दे चुके हैं। जिसमें वार्ड की कॉलोनियों में पानी की समस्या, बीकानेर रोड पर बंद पड़े फोरलेन निर्माण, अस्पताल तक पिछले एक-डेढ़ साल से बंद पड़ी रोड लाइटों, ठेकेदार की ओर से जगह-जगह खोदी गई खाई व आरओबी निर्माण के चलते पटरियों के पास बनाए गए अस्थाई रास्ते को सही करवाना की मांग शामिल है। बार-बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने पर गुरुवार को पार्षद कड़वा ने अधिकारियों को कड़वी बातें सुनाई।
केस चार – खुडख़ुड़ा व साडोकन के अतिक्रमण
साडोकन निवासी हरकाराम व खुडख़ुड़ा कलां निवासी प्रेमाराम पिछले 10-12 साल से गोचर व अंगोर भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग कर रहे हैं। दोनों ही मामलों में जोधपुर हाईकोर्ट ने आदेश दे रखे हैं। इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा। दोनों परिवादी हर माह कलक्टर के समक्ष पेश होकर एक ही मांग दोहराते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। गुरुवार को भी दोनों ने अतिक्रमण हटाने व खुडख़ुड़ा में गोचर भूमि पर हो रहे अवैध खनन को रुकवाने की मांग की।
केस पांच – सुरपालिया के मोहनराम ने दी आत्मदाह की चेतावनी
जिले के सुरपालिया निवासी मोहनराम जाट पिछले तीन साल से कटाणी रास्ते को खुलवाने की मांग कर रहा है। खास बात यह है कि जायल के उपखंड अधिकारी ने रास्ता खुलवाने के आदेश भी कर दिए, लेकिन अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी पालना नहीं करवा रहे हैं। मोहनराम ने गुरुवार को कलक्टर से कहा कि रास्ता खुलवाने के लिए वह बार-बार कार्यालयों का चक्कर काट रहा है, लेकिन राहत नहीं मिली। अब उसे न्याय नहीं मिला तो आत्मदाह करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसी प्रकार सुरपालिया के नारायणसिंह झाला ने भी उसके खेत से लगने वाले कटाणी रास्ते को खुलवाने की मांग की।
केस छह – हाउसिंग बोर्ड का बदहाल सामुदायिक भवन
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी ताऊसर रोड की दो बड़ी समस्याओं को लेकर स्थानीय निवासी कैलाश वर्मा ने जनसुनवाई में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसमें एक सामुदायिक भवन की बदहाल हालत को सुधारने व दूसरी एलबीएस स्कूल के पास जमा होने वाले गंदे पानी की निकासी की मांग थी। वर्मा ने बताया कि लाखों रुपए से निर्मित सामुदायिक भवन पिछले काफी दिनों से असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। इसको लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं।