नागौर. खाद्य पदार्थों में मिलावट रूपी ‘जहर’ की जांच के लिए लाखों रुपए खर्च कर करीब एक साल पहले नागौर सहित अन्य जिलों में बनाई गई खाद्य प्रयोगशालाएं (फूड लैब) स्टाफ व उपकरणों के अभाव में धूल फांक रही हैं। नागौर सहित प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में फूड लैब चालू नहीं होने से उनके यहां लिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच दूसरे बड़े जिलों की लैब से करवानी पड़ती है, जिसके कारण न तो समय पर रिपोर्ट मिलती है और नही मिलावटखोरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो रही है।
गौरतलब है कि समय के साथ खाद्य पदार्थों में बढ़ रही मिलावट को देखते हुए राज्य सरकार ने करीब पांच साल पहले बजट में सभी जिला मुख्यालयों पर फूड लैब बनाने की स्वीकृति दी थी, लेकिन सरकार ने बजट घोषणा के करीब दो साल बाद दिया। नागौर सहित अन्य जिलों में लैब बनाने के लिए प्रति लैब करीब 90 लाख का बजट स्वीकृत किया था, जिससे कई जगह लैब का भवन बन गया, जबकि कुछ जगह समय पर जमीन नहीं मिलने के कारण भवन ही नहीं बन पाया। गौरतलब है कि प्रत्येक लैब के लिए दस पद स्वीकृत होंगे। जिनमें एक खाद्य विश्लेषक, कनिष्ठ विश्लेषक, तकनीकी सदस्य प्रयोगशाला सहायक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
यह है प्रदेश की स्थिति
– नागौर में जनवरी 2023 में फूड लैब का भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन अब तक न तो स्टाफ नियुक्त किया और न ही पूरे उपकरण मिले। इसके चलते फूड लैब पर ताला लगा हुआ है।
– सीकर में पुराने सरकारी भवन को ही नया नाम दिया गया है, लेकिन लैब आज भी शुरू नहीं हुई है।
– श्रीगंगानगर जिले में खाद्य प्रयोगशाला के लिए नए भवन का निर्माण होने के बाद उपकरण भी पहुंच गए, लेकिन स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से खाद्य प्रयोगशाला आज तक शुरू नहीं हो पाई। भवन का निर्माण दो साल पहले हो गया था, जिस पर ताले लटके हुए हैं। – हनुमानगढ़ में खाद्य प्रयोगशाला का ना कोई भवन बना है और ना किसी तरह के उपकरण आए हैं।
– डूंगरपुर में खाद्य प्रयोगशाला का भवन ही नहीं बना है, अभी केवल जमीन आवंटन हुआ है। डूंगरपुर व प्रतापगढ़ के नमूनों की जांच बांसवाड़ा में की जा रही है।
– अलवर में खाद्य प्रयोगशाला करीब 50 साल से अधिक समय से संचालित है, लेकिन वर्तमान में स्थायी एनालिस्ट नहीं होने से एक्ट के सैंपल जांच के लिए बाहर भेजे जा रहे हैं। यहां सिर्फ सर्वे के सैंपलों की जांच हो रही है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी हैं, फूड एनालिस्ट
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सरकार पिछले कुछ सालों से काफी सख्ती दिखा रही है। पहले जहां कई जिलों में एक भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं था, वहां अब तीन से चार खाद्य सुरक्षा अधिकारी लगाए गए हैं, लेकिन लैब में फूड एनालिस्ट नहीं से नमूनों की जांच बाहर से करवानी पड़ती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या बढऩे से नमूनों की संख्या भी काफी बढ़ी है, इससे जोन स्तर के फूड लैब पर काम का दबाव बढ़ा है।
एक मशीन आई है
नागौर की फूड लैब में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए हाल ही में एक मशीन आई है। इसको इंस्टॉल करना बाकी है। इस मशीन के साथ और उपकरण आएंगे या इसी से जांच होगी, इस सम्बन्ध में अभी तक अजमेर जोन से हमें कोई निर्देश नहीं मिले हैं। साथ ही फूड एनालिस्ट भी लगाया जाना है। उसके बाद ही लैब शुरू हो पाएगी।
– बाबूलाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, चिकित्सा विभाग, नागौर।
पत्रिका ने बार-बार उठाया मुद्दा
जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच में देरी व खाद्य प्रयोगशाला की आवश्यकता को लेकर राजस्थान पत्रिका ने समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर सरकार व अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया। पत्रिका ने 14 नवम्बर 2021 को समाचार प्रकाशित कर बताया कि मुख्यमंत्री ने दो साल पहले बजट में जिला मुख्यालय पर फूड लैब खोलने की घोषणा की तथा जोश-जोश में प्रदेश स्तर पर तीन कमेटियां भी गठित की गई और प्रयोगशाला के सभी जिलों से प्रस्ताव भी मांगे, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। खबर प्रकाशन के बाद विभाग ने सीएमएचओ कार्यालय में जमीन चिह्नित की तथा दुबारा रिपोर्ट भेजी। जिसके बाद सरकार ने दो साल पहले बजट जारी किया और भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन अब तक लैब में खाद्य पदार्थों की जांच शुरू नहीं हो पाई है।