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सुबह से सुरों का समागम, संगीतमयी शहर
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सुबह से सुरों का समागम, संगीतमयी शहर

जाल सभागृह में एक दिनी कालजयी कुमार गंधर्व संगीत समारोह का आयोजन

इंदौर। पं. कुमार गंधर्व के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर जाल सभागृह में बुधवार को एक दिनी संगीत समारोह का आयोजन किया गया। शहर में पहली बार हुए इस आयोजन ने शास्त्रीय संगीत श्रोताओं को सुरों से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत शहर के ख्यात गायक गौतम काले ने भौर के राग ललित से की। उन्होंने राग ललित में विलंबित रूपक ताल बदरिया शोर मचाए, द्रुत तीनताल में बाल समय रवि भक्ष लियो और गोविंद दामोदर माधवेती स्त्रोत की मन छू लेने वाली प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की सिलसिले को संचालित करते हुए गायिका शाल्मली जोशी ने राग बहादुरी तोड़ी में आड़ा-चौताल में होरी की सुंदर प्रस्तुति दी। शहर की ख्यात गायिका कल्पना झोकरकर ने राग नट भैरव में राग काफी में टप्पा सुनाते हुए मधुर बंदिशों को पेश किया।

रागों ने किया मंत्र मुग्ध

लगभग 11.30 पर शुरु हुई पं. रघुनंदन पणशीकर की प्रस्तुति में दिन के समय के राग अलैहया बिलावल, ललित पंचम सुनने को मिला। इसके साथ ही उन्होंने मराठी अभंग गायन भी पेश किया। कार्यक्रम में वादन की मधुरता को बिखेरते हुए देश की ख्यात गायिका अन्नपूर्णा देवी के सुशिष्य पं. बंसत काबरा ने राग गौड़ पर सरोद वादन की मन छू लेने वाली प्रस्तुतियां दी। शहर में पहली बार हुई पं. काबरा की प्रस्तुति श्रोताओं को बहुत पसंद आई।