तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में रविवार को नाविकों की तत्परता स एक बड़ा हादसा होने से टल गया। यहां नर्मदा स्नान के दौरान जयपुर से आए तीर्थयात्रियों के जत्थे में शामिल पिता, पुत्र और पोता गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। घटना रविवार सुबह 11 बजे चक्रतीर्थ घाट की है। यहां मौजूद नाविक कुलदीप केवट ने अपनी नाव की मदद से तीनों को बचाया।
रविवार को जयपुर से तीर्थदर्शन के लिए बाबूदाजी अपने परिवार के साथ ओंकारेश्वर आए थे। वह चक्रतीर्थ घाट पर अपने पुत्र आशीष और पोते सुमित के साथ नहा रहे थे, पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने से तीनों डूबने लगे। उनके साथ आए अन्य लोगों ने चीख पुकार मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर घाट पर मौजूद कुलदीप केवट ने सहायता के लिए तुरंत ही अपनी नाव दौड़ाई और तीनों के पास लेकर पहुंचे। कुलदीप की सहायता से तीनों तीर्थयात्री एक-एक कर नाव पर चढ़े और उनकी जान बच गई। मौके पर यदि नाविक नहीं होता तो संभवत: बड़ा हादसा हो सकता था।
हादसों से सबक नहीं, सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
ओंकारेश्वर में डूबने की घटनाओं से लगातार श्रद्धालुओं की जान जा रही है। देखने में आ रहा है कि प्रशासन द्वारा इस दिशा में गंभीरता पूर्वक प्रयासों में लापरवाही और कमी देखी जा रही है। नाविकों ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा सुरक्षा नाव तैनात रहती है, किंतु इस वर्ष हादसों के बाद भी सुरक्षा नाव नहीं लगाई गई। ना ही कोई गोताखोर तैनात है। कहां तक सुरक्षित रूप से स्नान किया जाए ऐसी कोई सीमाा रेखा नहीं है।