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प्रतापगढ़. भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा की ओर से सोमवार को जिलेभर में आदिवासी समुदाय से जुड़े विभिन्न और भील प्रदेश राज्य बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। शहर के नगर परिषद से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाल कर राष्ट्रपति के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के जिला संयोजक बद्री भगोरा ने बताया कि आदिवासी समुदाय से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत पश्चिमी भारत के भील आदिवासी संस्कृति क्षेत्र के चार राज्यों का सीमाएं इलाका और एक केंद्र शासित प्रदेश का क्षेत्र जोडकऱ अलग से भील प्रदेश राज्य का गठन की मांग ेकी गई। शहर के नगर परिषद से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रैली निकाली गई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलक्ट्रेट पहुंची। जहां प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। राष्ट्रपति के नाम सौंप गए 35 सूत्रीय ज्ञापन में विशेष रूप से विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और वन संरक्षण कानून अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं करने की मांग की गई। इसके साथ ही संस्कृत बोर्ड का गठन करने और अनुसूचित जिलों के उपखंड मुख्यालयों पर आदिवासी महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित कर आदिवासी प्रेरणा स्थल विकसित करने सहित विभिन्न मांगों को पूरा करने की बात कही। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश मइडा ने बताया कि सरकार अगर आदिवासी परिवार की मांगों को नहीं मानती है तो प्रदेश और देश स्तर पर भी प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद रहे।
दलोट. पृथक भील प्रदेश राज्य की मांग के लिए दलोट ब्लॉक में ट्रैक्टरों से रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन दिया। ज्ञापन देने से पूर्व सभा की। भील प्रदेश राज्य की मांग के लिए नारे लगाते हुए आदिवासी समुदाय के साथ ही साथ अन्य समुदाय भी पृथक भील प्रदेश राज्य की मांग के लिए शामिल हुए। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के ब्लॉक संयोजक किशन मईडा ने बताया कि विभिन्न मांगों को शामिल करते हुए राष्ट्रपति के नाम पृथक भील प्रदेश राज्य बनता है तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं विकास के नए आयाम खुलेंगे एवं सभी को सामाजिक न्याय मिलेगा। साथ ही साथ संपूर्ण क्षेत्रवासियों का सर्वांगीण विकास होगा।