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इंदौर का गौरव: लंदन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बढ़ाया भारत का मान
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इंदौर का गौरव: लंदन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बढ़ाया भारत का मान

- खूनी पसीने (हिमेटोहाइड्रोसिस) के होम्योपैथिक उपचार पर शोध प्रस्तुतीकरण के साथ ही नई पुस्तक का हुआ विमोचन
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इंदौर

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Sikander Pareek

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Updated: 29 Oct 2025, 10:03 PM IST

इंदौर। इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक और शिक्षाविद् डॉ. ए.के. द्विवेदी ने एक बार फिर शहर और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। हैनीमैन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी, यूके द्वारा लंदन (यूनाइटेड किंगडम) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस में डॉ. द्विवेदी ने अपने शोध पत्र “हिमेटोहाइड्रोसिस (खूनी पसीना) के होम्योपैथिक उपचार” पर सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रेजेंटेशन दिया।

डॉ. द्विवेदी ने भारतीय जीवनशैली, आहार-विहार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व पर भी विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा गुड़ और चने का सेवन रक्तवृद्धि में सहायक है, जबकि रात में हल्दी वाला दूध पीना और सुबह तुलसी के पत्ते खाना रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि यदि भारतीय पारंपरिक जीवनशैली को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनाया जाए, तो गंभीर बीमारियों की रोकथाम और उपचार दोनों में होम्योपैथी की प्रभावशीलता और सशक्त रूप से सिद्ध हो सकती है। हैनीमैन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी, यूके द्वारा आयोजित उक्त सम्मेलन में दुनियाभर से जाने-माने होम्योपैथिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। पूरे मध्य प्रदेश से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. द्विवेदी अकेले चिकित्सक रहे। गौरतलब है कि डॉ. ए.के. द्विवेदी वैज्ञानिक सलाहकार मंडल सीसीआरएच, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की कार्यपरिषद के सदस्य और शिक्षा स्वास्थ्य न्यास, नई दिल्ली के प्रांत संयोजक भी है।

पुस्तक ‘हिमेटोहाइड्रोसिस एवं बोन मैरोडिसऑर्डर्स का होम्योपैथिक उपचार’ का हुआ विमोचन

सम्मेलन के दौरान डॉ. द्विवेदी की नई पुस्तक ‘ हिमेटोहाइड्रोसिस एवं बोन मैरोडिसऑर्डर्स का होम्योपैथिक उपचार’ का भी औपचारिक विमोचन किया गया। इस पुस्तक में डॉ. द्विवेदी ने खूनी पसीने (हिमेटोहाइड्रोसिस) जैसी अत्यंत दुर्लभ बीमारी और अस्थि-मज्जा (बोन मैरो) से संबंधित विकारों के होम्योपैथिक उपचार पर अपने शोध, अनुभव और अध्ययन को विस्तार से प्रस्तुत किया है। पुस्तक विमोचन के अवसर पर हैनीमैन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी (लंदन) के प्राचार्य डॉ. शशि मोहन शर्मा, डॉ. लोराजॉर्जिवा (बुल्गारिया) सहित कई देशों के विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहे।