वर्षा के जल को गांव में ही रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है। गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है वॉटर हार्वेस्टिंग कर बादलों से आए जल को वापस जमीन में पहुंचाना। इसे एक मिशन की तरह लें और अपने-अपने गांवों में वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को बढ़ाएं। यह बात कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सोमवार को किशोर सभागृह में जल संवाद के दौरान उपस्थित ग्रामीण जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही।
जिले में वर्षा जल सहेजकर गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सभी शासकीय एवं निजी भवनों पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए जाने का अभियान चल रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिला प्रशासन, नगरीय और ग्रामीण स्थानीय निकायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। साथ ही उद्योगों, स्वयंसेवी संगठनों स्वयं सहायता समूहों (एसएसजी), गृहस्वामियों, पंचायतों और समुदाय आधारित संगठनों की सक्रिय भागीदारी के साथ वर्षा जल को सहेजना है। जिले में यह अभियान 5 चरणों में क्रियान्वित होकर पूर्ण होगा।
जल संरक्षण की आवश्यकता एवं उसके तकनीकी पक्ष पर विस्तृत चर्चा के लिए सोमवार को जल संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। जल संरक्षण की आवश्यकता एवं उसके तकनीकी पक्ष पर 36 मास्टर ट्रेनर्स ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में जिले के सभी 419 ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनपद पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष, सदस्य मौजूद रहे। जिला देवास से आए डॉ. सुनील चतुर्वेदी, निदेशक विभावरी एवं प्रो. डॉ. समीरा नईम समन्वयक इंदौर उज्जैन संभाग राज्य आनंद संस्थान देवास द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर द्वारा सभी जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेड़े, जिपं सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, जनपद पंचायत खंडवा सीईओ निकिता मंडलोई सहित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।