नागौर. आवासीय क्षेत्रों में ग्रीन पट्टी को लेकर खुलेआम प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। घरों के निर्माण के साथ ही आने-जाने के लिए तयशुदा मार्ग पर पक्की सीमेंटेड पट्टियां बनाई जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि घरों या भवनों के निर्माण के साथ ही इसके एक से दो मीटर तक की जगह को पक्के सीमेंटेड निर्माण कर उनको घेरे जाने का खेल जोरों से चल रहा है। इसके चलते न केवल राजकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जे कर पक्के निर्माण किए जा रहे हैं, बल्कि इससे ग्रीन पट्टी का हिस्सा भी गायब होता रहा है। स्थानीय निकाय के प्रावधानों के अनुसार घरों के आगे हिस्से में मार्ग को बाधित न होने की स्थिति में केवल हरियाली लगाई जा सकती है, लेकिन पक्के निर्माण नहीं कराए जा सकते हैं। इसके बाद भी स्थानीय निकाय के जिम्मेदारों की कथित रूप से मिलीभगत के खेल के चलते ग्रीन पट्टी को गायब करने की होड़ चल रही है।
आवासीय क्षेत्रों में निर्माणों के प्रावधानों को ताक पर रखकर ग्रीन पट्टी को गायब करने का काम जोर-शोर से चल रहा है। इसके चलते यह पूरा शहर अब कंक्रीटों के जंगल में बदलने लगा है। आवासीय एरिया में लगभग 90 प्रतिशत जगहों पर प्रावधानों को अंगूठा दिखाते हुए ग्रीन पट्टी को गायब किया जा चुका है। रही-सही जगहों पर भी हो रहे निर्माणों के चलते अब स्थिति विकट होने लगी है।
पड़ताल में ग्रीन पट्टी मिली गायब
शहर के सुगन सिंह सर्किल, कृषि मंडी के पीछे, इंदिरा कॉलोनी, पुराना शहर, सोनी की बाड़ी, प्रतापसागर कॉलोनी, लोहारपुरा, किदवई कॉलोनी, दिल्ली दरवाजा एवं एफसीआई गोदाम के आसपास एरिया में करीब पांच घंटे तक हुई पड़ताल में ग्रीन पट्टी का हिस्सा गायब मिला। इन क्षेत्रों में घरों के निर्माण के साथ ही उसके आगे एक से दो मीटर एरिया में कुछ जगहों पर पक्के चबुतरे बनाए जा चुके हैं तो कई जगहों पर प्लेन सीमेंटेड बनाकर उसे घेरे में कवर कर लिया गया है। कुछ स्थानों पर फुटपााथ की तर्ज पर गिट्टियां आदि बिछाकर उसे सीमेंटेड करा दिया गया। इसकी वजह से आने-जाने का मार्ग न केवल निर्धारित एरिया से कम हो गया, बल्कि इस पर अघोषित रूप से इनका कब्जा हो गया। जबकि स्थानीय के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार कोई भी निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है।
मिलीभगत के खेल में नहीं होता सर्वे
स्थानीय के अधिकारियों से आवासीय एरिया क्षेत्रों में हो रहे अतिक्रमण के मामले पर बातचीत की गई तो अधिकारिक रूप से अधिकारी इस पर कुछ भी कहने से बचते रहे। इस संबंध में जब सघन रूप से पड़ताल की गई तो सामने आया कि इसकी जानकारी तो सभी को है कि इस तरह के अवैध निर्माण किए जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक रसूखात की हडक़ एवं कथित रूप से मिलीभगत के खेल के चलते इस पर कार्रवाइयां नहीं की जा रही है। यही वजह रही कि नगरपरिषद की ओर से पिछले कई सालों से न तो सर्वे कराया गया, और न ही कोई जांच।
ग्रीन पट्टी अनिवार्य है
स्थानीय निकाय के विभाग के अधिनियम के तहत घर या भवन के आगे एक से डेढ़ मीटर की दूरी तक पौधे तो लगाए जा सकते हैं, लेकिन पक्के निर्माण नहीं किए जा सकते हैं। जांच में ऐसा पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
इनका कहना है…
ग्रीन पट्टी के प्रावधानों की पालना कराए जाने के लिए नगरपरिषद कटिबद्ध है। यदि प्रावधनों के प्रतिकूल कहीं ग्रीन पट्टी पर कोई निर्माण आदि हुआ है तो इसकी जांच करा ली जाएगी।
रामरतन चौधरी, आयुक्त, नगरपरिषद नागौर