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घायल और याददाश्त खोने वाले मरीजों का सहारा है ‘सहारा वार्ड’

- परिवार से भी मिला रहे, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एक मात्र ऐसा वार्ड

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इंदौर. एमवायएच अस्पताल का सहारा वार्ड 9 साल से बेसहारा लोगों का सहारा बना हुआ है। ऐसे घायल जो अपनी मानसिक स्थिति खो चुके हैं, उन्हें इमरजेंसी विभाग से उपचार के बाद इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। याददाश्त वापस आने पर उनके परिजन का पता लगाकर घर भी भेजा जा रहा है। हर त्योहार पर उनके साथ खुशियां बांटी जा रही हैं। प्रदेश में एमवायएच एक मात्र ऐसा सरकारी अस्पताल है, जहां सहारा वार्ड है।

16 अगस्त 2016 को छह बिस्तरों से वार्ड की शुरुआत हुई थी। यहां तमिलनाडु, नागपुर, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, लुधियाना और नेपाल के लोग भी भर्ती रहे। ठीक होने पर इन्हें परिजन से मिलवाया गया या आश्रम में शिफ्ट कराया गया। इंचार्ज सिस्टर सीमा सिंह, शिल्पा हिल, अनिता नागेंद्र, पिंकी और अन्य स्टाफ आत्मीयता से मरीजों की देखरेख करता है। मालूम हो, इमरजेंसी में पहुंचने वाले गंभीर रूप से घायल ऐसे मरीज, जिनके साथ कोई नहीं होता था, या विक्षिप्त नजर आने वालों के लिए इलाज के बाद देखरेख के लिए अलग से वार्ड नहीं था। तत्कालीन एमवायएच अधीक्षक डॉ. वीएस पाल ने छह बिस्तरों का सहारा वार्ड शुरू कराया। जहां इन मरीजों को रखा जाने लगा। अब यहां 20 मेल व 10 फीमेल बिस्तरों पर भर्ती करने की सुविधा है।

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