कहते है कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच नहीं पाता है। ऐसा ही मामला हरसूद थाना क्षेत्र में सामने आया है। शातिर चोर गिरोह चोरी के समय लोकेशन ट्रेस न हो, इसके लिए अपने मोबाइल बंद कर लेता था। यहीं चालाकी उनकी गिरफ्तारी का कारण भी बनी। हरसूद पुलिस ने नकबजनी करने वाले चोर गिरोहा का खुलासा किया। पुलिस ने तीन चोरों के पास से 7 लाख रुपए का मश्रुका भी बरामद किया। इस मामले में माल खरीदने वाले एक अन्य को भी आरोपी बनाया गया है।
हरसूद थाना क्षेत्र अंतर्गत सेक्टर 5 हरसूद स्थित एक सूने मकान में 16 अगस्त को चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना में लिया। पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय द्वारा अपराधियों को पकडऩे के निर्देश जारी किए गए। एएसपी ग्रामीण राजेश रघुवंशी द्वारा एसडीओपी हरसूद लोकेंद्रसिंह ठाकुर के नेतृत्व में टीम गठित की गई। हरसूद टीआई निरीक्षक राजकुमार राठौर को विवेचना के दौरान सूचना मिली कि सेक्टर 6 में कुछ लोग किराये का मकान लेकर रह रहे है, संभवत: ये चोर हो सकते है। पुलिस ने संदेहियों के मोबाइल नंबर की टॉवर लोकेशन व डिटेल पता की। संदेहियों के मोबाइल चोरी की घटनाओं के दौरान रात से लेकर सुबह तक बंद पाए गए। इसी आधार पर पुलिस ने पूछताछ की तो सारा मामला सामने आ गया।
दो दोस्त, तीसरा खेल में मिला, बन गया गिरोह
पुलिस ने तीनों संदेही आरोपियों शुभम पिता भगवानसिंह निवासी इनपुन पुनर्वास, मांगीलाल उर्फ गोलू पिता भैयालाल निवासी घोघलगांव पुनर्वास, दुर्गेश पिता सुरेश निवासी फोकटपरा छनेरा और बेचवाल समर पिता बजारी निवासी हुगली पश्चिम बंगाल, हाल मुकाम सनावद से पूछताछ की। इसमें शुभम पुराना चोर निकला और मांगीलाल का दोस्त है। शरद से दोनों की दोस्ती क्रिकेट खेलते हुए हुई थी। तीनों ने मिलकर गिरोह बना लिया और चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगे।
दिन में करते थे रैकी, रात में चोरी
चोर गिरोह ने हरसूद में किराये का मकान लिया और दिन में बाइक से सूने मकानों की रैकी करते थे। इस दौरान भी वो अपने मोबाइल बंद कर लेते थे। रात को चोरी की घटना को अंजाम देने से पहले दो-तीन किमी दूरी पर ही मोबाइल बंद करते और चोरी की घटना को अंजाम देते। आरोपियों की निशानदेही पर सोने, चांदी के जेवर, दो बाइक कुल 7 लाख का माल बरामद किया गया। रविवार चारों आरोपियों को न्यायालय पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। कार्रवाई में थाना प्रभारी हरसूद निरीक्षक राजकुमार राठौर, उनि रमेश मोरे, सउनि नानाराम पाटीदार, नरेन्द्रसिंह वर्मा, प्रआर हरिओम मीणा, शिवशंकर उपाध्याय, मंगलसिंह चौहान, आर. दिलीप बोरखेडे, भगवानसिंह मस्कोले, हेमंत जाट की सराहनीय भूमिका रही।