11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पाली
VIDEO : एक संन्यासी ने उठाया ये कदम, पढि़ए पूरी खबर
Play video

VIDEO : एक संन्यासी ने उठाया ये कदम, पढि़ए पूरी खबर

-गली-मोहल्लों में घूमकर लोगों को बांट रहे हैं पुस्तकें व छाया प्रतियां
Google source verification

पाली

image

Suresh Hemnani

Oct 30, 2018

महेश चन्देल
धनला। जोजावर के 73 वर्षीय दिव्यांग स्वामी भजनानंद सन्यासी पिछले 30 वर्षों से समाज में नशामुक्ति की अलख जगा रहे हैं।एक हाथ व पैर लकवाग्रस्त होने के बावजूद वे जोजावर सहित आस-पास के गांवों की गली-मोहल्लों में घूमकर घरों व प्रतिष्ठानों पर जाकर लोगों से मिलते हैं। पुस्तकें तथा छाया प्रतियां बांटकर ज्ञानवर्धक बातें बताते हुए नैतिकता का पाठ पढा रहे हैं। उनके इस कार्य में उनकी पत्नी शायर कंवर भी उनका पूरा सहयोग करती हैं।

विद्यार्थियों को कर रहे हैं प्रेरित
स्वामी भजनानंद सन्यासी आस-पास के निजी तथा सरकारी शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों को सुसंस्कारों का पाठ पढाने का कार्य भी कर रहे हैं। वे जब भी विद्यार्थियों के बीच होते उन्हें नैतिकता पाठ पढाते तथा संस्कारवान बनने के लिए प्रेरित करते हैं। अभियान को लेकर स्वामी क्षेत्र की कई स्कूलों का भ्रमण कर चुके हैं।

भंवरसिंह से बने भजनानंद
पत्रिका को अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना बताते हुए भंवरसिंह ने बताया कि 1967 में वे इण्डियन आर्मी में भर्ती हुए। उसके बाद एयरफोर्स में सेवाएं दी। उस दौरान व्यसन की लत ज्यादा होने से एक दिन शराब के नशे में लडखड़़ाते हुए नाळे में 10 फीट नीचे गिर गए। रात भर वहीं पड़े रहे। इस हादसे में उनका दाहिना हाथ और एक पांव लकवाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद भंवरसिंह ने सेवानिवृत्ति ले ली और स्वयं नशे की लत को छोडऩे का संकल्प किया। उसके बाद वे आर्य समाज से जुडकर वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार करते हुए समाज में व्यसनवृति त्यागने का संदेश दे रहे हैं। औरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। भंवरसिंह की पत्नी शायरकंवर भी अपने पति की सेवा के साथ ही उनके कार्य में पूरा सहयोग करती हैं। परिवार में दोनों अकेले ही हैं। तीन संतानों में से पुत्र विक्रम की 7 वर्ष की उम्र में मौत हो गई तथा दो बेटियां सत्यवंती आर्या व वेदकुमारी आर्या को विवाह कर ससुराल भेज दिया है।

व्यसन बुरी लत है
व्यसन सभी प्रकार के बुरे होते हैं तथा व्यक्ति व समाज के लिए घातक हैं। व्यसन छुड़वाना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। -स्वामी भजनानंद, सन्यासी