
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों के महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया है। उपराष्ट्रपति के इस फैसले के बाद एक बार फिर लोकतंत्र पर घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र बचाने और लोकतंत्र को खारिज करने बीच की लड़ाई बता रही है। महाभियोग प्रस्ताव पर सात रिटायर्ड सासंदों के दस्तखत होने की वजह से राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. साथ ही बताया यह भी जा रहा है कि उपराष्ट्रपति को इस प्रस्ताव में कोई मेरिट नहीं दिखा. यानी तकनीकी आधार पर इस प्रस्ताव को खारिज किया या है. इस महाभियोग पर फैसला लेने से पहले वेंकैया नायडू ने संविधान विशेषज्ञों से काफी विचार विमर्श किया.
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज किया चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव
कानून के जानकारों से राय
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस सीजेआई पर महाभियोग प्रस्ताव लाकर इसे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई कहा। उनकी इस लड़ाई में उन्हें विपक्ष से 7 दलों का साथ भी मिला…लेकिन तकनीकी आधार पर राज्यसभा के चेयरमैन ने इसे खारिज कर दिया। लड़ाई में हार के बाद कांग्रेस को तिलमिलाना तो बनता है लिहाजा उन्होंने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने कहा इस फैसले पर कानून के जानकारों से बात कर राय ली जाएगी।
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अब होगी सीधी लड़ाई
इस बीच कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने जरूर ट्वीट के जरिये उपराष्ट्रपति पर ही निशाना साधा है। सुरजेवाला ने लिखा…महाभियोग लाने के लिए 50 सांसदों की जरूरत होती है, जो हमने पूरा किया. राज्यसभा चेयरमैन प्रस्ताव की मेरिट तय नहीं कर सकते हैं. अब ये लड़ाई सीधे तौर पर लोकतंत्र को बचाने वाले और लोकतंत्र को खारिज करने वालों के बीच में है।
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बीजेपीः कांग्रेस ने ऐसा कर खुदकुशी की
सीजेआई पर महाभियोग प्रस्ताव के खारिज होने के बाद जहां कांग्रेस तिलमिला रही है वहीं बीजेपी ने कहा है कि ये तो होना ही था. राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि उपराष्ट्रपति ने यह फैसला लेने में 2 दिन का वक्त लगा दिया। उन्हें यह प्रस्ताव तत्काल खारिज कर देना चाहिए था। कांग्रेस ने ऐसा कर खुदकुशी की है।
भूषणः राजनीति से प्रेरित फैसला
उधर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया। जबकि भाजपा ने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव कांग्रेस का राजनीति के तहत उठाया गया कदम था जो विफल साबित हुआ। वेंकैया नायडू ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लाया गया ये महाभियोग ना ही उचित है और ना ही अपेक्षित है. इस तरह का प्रस्ताव लाते हुए हर पहलू को ध्यान में रखना चाहिए। इस खत पर सभी कानूनी सलाह लेने के बाद ही मैं इस प्रस्ताव को खारिज करता हूं. कांग्रेस का कहना है उसे पहले से ही इस फैसले का अनुमान था, उसको कोई झटका नहीं लगा। बहरहाल कांग्रेस भले ही इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई का हवाला दे रही हो, लेकिन अब तक की कवायद उसके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है।