रायगढ़. शासन से सब्सिडी के रूप में जब उद्योगपतियों को राशि लिया जाना होता है तो लागत को बढ़ा कर बताया जाता है, ताकि शासन ने उन्हें सब्सिडी अधिक मिले। वहीं दूसरी ओर उसी उद्योग में जहां टैक्स देना होता है वहां लागत राशि घटा दी जाती है, ताकि कम टैक्स शासन को देना पड़े। इस तरह का मामला जिले में दो राइस मिलों में उजागर हुआ है।
नवगठित जिले सारंगढ़ बिलाईगढ़ के मानिकपुर में श्री हनुमान फुड्स राइस मिल के नाम से राइस मिल स्थापित की गई है। इसमें जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र में दिए ब्यौरा के अनुसार ५ अगस्त २०२१ से २३ मार्च २०२२ तक एक करोड़, ३४ लाख ४८ हजार ७४८ रुपए खर्च किए जाने विवरण बताया गया है। इसमें राइस मिल की नींव से लेकर शेड, मजदूरी व अन्य मशीनरी सामान का बिल भी दर्शाया गया है। इस विभाग के लागत के अनुसार संबंधित फर्म को सब्सिडी मिलना है। वहीं दूसरी ओर इसी फर्म के द्वारा औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग में उक्त लागत कम बताया गया है। इस विभाग में फर्म के लागत का एक प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में जमा करना पड़ता है। ऐसे में यहां लागत ३७ लाख ५० हजार का एक प्रतिशत ३७ हजार ५०० रुपए जमा किया गया है, जो उक्त फर्म के लागत का एक प्रतिशत है। इसी तरह दूसरा मामला नवगठित सारंगढ़ जिला के ही बरमकेला ब्लाक के अमूर्रा गांव का है। यहां महालक्ष्मी राइस मिल स्थापित किया गया है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में उक्त फर्म की लागत १ करोड़ ३० लाख ६८ हजार ५५० रुपए बताया गया है। वहीं दूसरी ओर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग में ३० दिसंबर २०२२ को जमा किए गए टैक्स में ५३ लाख २० हजार बतरसर गस है। इसका एक प्रतिशत ५३ हजार दो सौ रुपए जमा किया गया है।
दोनों विभागों में नहीं सामाजस्य
खास बात यह है कि जिला मुख्यालय में दोनों विभाग संचालित हैं। इसके बाद भी दोनों विभागों में सामाजस्य नहीं है। एक विभाग में लागत की फाइल आती है तो दूसरे विभाग से न तो इसकी जानकारी ली जाती है और ना ही दी जाती है। इससे शासन से सब्सिडी के रूप में जाने वाली ज्यादा राशि संबंधित फर्म को जाती है। वहीं टैक्स के रूप में आने वाली कम राशि शासन को आती है।
एक विभाग ने जारी की नोटिस दूसरे विभाग की चुप्पी
यह मामला उजागर हुआ तो जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग के अधिकारी एके राठौर का कहना है कि यह उनके यहां का मामला नहीं है। ऐसे में उन्होंने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की, जबकि लागत राशि अधिक दिए जाने के मामले में संबंधित फर्म से जवाब तलब किया जा सकता है। वहीं औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के द्वारा नोटिस जारी किए जाने की बात कही जा रही है।
वर्सन
मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया गया है।
मनीष श्रीवास्तव, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग