किसानों का कहना है कि खुले में अनाज होने के कारण उपज में नुकसान होता है। अगर किसान प्लेटफार्मों पर जगह होती तो खुले परिसर में लगाना ही नहीं पड़ती ट्राली, अब रात भर निगरानी भी करों और पानी छिंटा आने पर बचाना भी है। मंडी अधिकारियों का सख्ती से प्लेटफार्म खाली करवाना चाहिए, ताकि किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, क्योंकि मंडी में प्याज, लहसुन और गेहूं इन दिनों अच्छी आवक हो रही है, पानी लगने पर गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है और फिर ओने पोने दाम पर उपज खरीदी जाती है। मंडी के विश्रामगृह में पलंग और बिस्तरों की व्यवस्था नहीं है, जबकि मंडी में एक हजार से अधिक किसान प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
40 प्रतिशत फसल निकलना शेष, फिर मंडराए संकट के बादल
जिले में 40 प्रतिशत के करीब रबी फसल कटना अभी बाकि और एक माह में दूसरी बार मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर फिर बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में किसानों के लिए फिर एक बार संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। सब्जी मंडी प्रांगण प्रभारी राजेंद्रकुमार व्यास ने बताया कि पानी की बूंदाबांदी आने पर पांच बजे नीलामी बंद कर दी गई थी, कुछ ट्रालियां शेड और परिसर में नंबर से खड़ी करवाई गई। दिक्कत की बात नहीं है मौसम को देखते हुए किसान तिरपाल लेकर आ रहे है।