आश्रम के स्वामी देवस्वरूपानंद महाराज ने बताया कि अखंड ज्ञान आश्रम में शुक्रवार को स्वामी स्वरूपानंद महाराज की मूर्ति का भक्तों ने सहस्त्रधारा अभिषेक किया। भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के अलग-अलग स्थानों से पहुंचे संतों के सान्निध्य में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा आश्रम में समाधी स्थल के समक्ष की गई। जहां भक्तों ने दर्शन वंदन का लाभ लिया।
ये संत महात्मा पहुंचे रतलाम
शुक्रवार को मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा अवसर पर स्वामी प्रभुतानंद महाराज चित्रकूट, स्वामी चिन्मयानंद महाराज जोधपुर, स्वामी शिवानंद महाराज सुजापूर, स्वामी आत्मानंद महाराज, स्वामी वासुदेवानंद महाराज उज्जैन, स्वामी देवस्वरूपानंद महाराज आदि संत महात्मा मौजूद थे। धर्मसभा के दौरान अनिल झालानी, मनोहर पोरवाल, कन्हैयालाल मोर्य, आरआर शर्मा, सतीश पुरोहित, डॉ. कृपालसिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने् शामिल होकर कथा श्रवण की।
अखंड आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा
अखंड ज्ञान आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा में भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने प्रथम दिन कहा कि सतयुग में भगवान का घर पानी था, जल ही घर था। त्रेता में पानी पर पुल तैयार किया। द्वापर में जल में नगर था। ऐसे भगवान को प्रणाम करते हैं। उन्होंने सिपी पर सूर्य की चमक पडऩे से चांदी प्रतीत होने और चांदनी रात में रस्सी को सर्प समझने पर चमका खाने का उदाहरण प्रस्तुत किया। महाराज ने कहा कि कष्ट निवारण के लिए सर्प कष्ट सहकर भी अपनी केचली उतार देता है, लेकिन हम अब तक नहीं उतार पाए है। धर्म-भक्ति में बाधाएं बहुत है, लेकिन इन बाधाओं को पार करके ही कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।