परिसर में चार सुंदर फव्वारे है जो बंद होकर टूट-फूट रहे हैं। लाइटिंग व्यवस्था, लेकिन अब खम्बो पर बल्व ही नहीं है। परिसर शराबियों का अड्ढा बन चुका है, दिन और रात यहां लोग मदिरापान करते नजर आते हैंं तो शराब की बोतला भी बिखरी पड़ी हुई है। लाखों रुपए खर्च कर संग्राहलय को सुधारने शुरुआत कई आला अधिकारियों ने की, लेकिन साल दर साल गुलाब चक्कर उजाड़़ता चला जा रहा है। यहां तक की संग्राहलय का शीलालेख भी परिसर में लावारिस अवस्था में पड़ा है। पूर्व में पुरातत्व विभाग ने करीब 30 वर्षों तक पुराने कलेक्टोरेट परिसर स्थित गुलाब चक्कर परिसर में जिले अलग-अलग क्षेत्रों से खुदाई में मिकली 27 प्राचीन प्रतिमाओं का संग्रह कर रखा था। पूर्व कलेक्टर नरेंद्रकुमार सूर्यवंशी ने भी छह माह में प्रतिमाओं को सुरक्षित कर संग्रहालय कार्य पूरा होने की बात कही थी, लेकिन अब तक न काम पूरा हुआ और ना ही संग्रहालय में मूर्तियां आई।
सात दिन में कार्य करने की दी थी चेतावनी
कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने गत सोमवार को बैठक में जिले में सांसद, विधायक एवं जनभागीदारी से स्वीकृति कार्यो की समीक्षा के दौरान सख्त नाराजगी व्यक्त कर चेतावनी देकर सात दिवस में अधूरे कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जिसमें रतलाम के गुलाब चक्कर का उन्नयन भी सम्मिलित था। इसके अलावा अम्बेडकर नगर का सामुदायिक भवन, आलोट में अनादि कल्पेश्वर मंदिर परिसर निर्माण भी शामिल है।
संग्रहलय में थी मूर्तियां
संग्रहालय में झर में सुर-सुन्दरी प्रतिमाएं थी, जिनके पैरो में नूपुर बंधे हैं। 6टीं से 14वीं शताब्दी तक की दिग्पाल, वायु, वरूण, नायिका, नवग्रह, गणेश, कुबेर, रेवन्त, लक्ष्मी, सूर्य, शिव, भैरव, नायिका, सूर्य अध्र्यभाग आदि कई मूर्तियों को संग्रहित कर रखा हुआ था। इनमें पांच बड़ी प्रतिमाएं संग्राहलय के बाहर उद्यान में तथा शेष 10 प्रतिमाएं संग्रहालय के हाल में सीमेंट से जोडक़र रखी हुई थी, जिन्हे वहां से हटाकर परिसर में एक चद्दर का शेड बनाकर रखी गई, जिन्हे आज तक नहीं उठाई वे अब मिट्टी में फिर से दफन होने लगी है।