
सीधी। डिजिटल युग में सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही आप लोगों पर भारी पड़ सकती हैं। इन दिनों सायबर फ्राड को लेकर नए-नए तरीके ईजाद हो रहे हैं, कहीं डिजिटल ऑरेस्ट यानि ऑनलाइन गिरफ्तारी कर आपकी गाढ़ी कमाई ऐंठी जा रही तो कहीं बैंक खाते से आपकी राशि गायब कर दी जा रही। इससे बचने के लिए सावधानी व जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
उक्त बातें पेंशनर्स के बीच सीधी पुलिस के सायबर एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने रखी। उल्लेखनीय है कि इन दिनों हर किसी की जुबान पर सायबर फ्राड के किस्से सुनने को मिल रहे हैं। आए दिन लोग सायबर फ्राड के शिकार होकर साइबर सेल के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। आम जनता को जागरुक करने के लिए पत्रिका और पुलिस की सायबर सेल ने लोगों के बीच जागृति लाने के उद्देश्य से पत्रिका कवच अभियान शुरू किया है। रविवार को इसी अभियान के तहत शहर के वार्ड क्रमांक-2 दुर्गा मंदिर प्रांगण में प्रोगे्रसिव पेंशनर एसोसिएशन के 30 से अधिक पदाधिकारियों व सदस्यों को सायबर फ्राड के तरीकों और उनसे बचने के उपायों से अवगत कराया गया।
ऑनलाइन फ्रॉड के विभिन्न तरीकों को विस्तार से समझाया–
सायबर सेल के प्रदीप मिश्रा ने पेंशनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों व सदस्यों को सायबर फ्रॉड के हर एक तरीके और उनसे बचने के एक-एक बिंदु को विस्तार से बताते हुए जागरुक किया। बताया, बिहार और झारखंड सहित अन्य राज्यों में बैठकर सायबर फ्रॉड किस तरह से आपको चूना लगाने के तरीके अपनाते हैं, और इससे आपको कैसे सावधान रहना है। इस अवसर पर सायबर सेल से आरक्षक विकास सिंह और आरक्षक विक्की सिंह भी उपस्थित रहे।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कार्रवाई नहीं-
प्रदीप मिश्रा ने बताया, इस समय डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं। हमारे देश सहित दुनिया में कहीं ऐसा कानून नहीं है, इसलिए यदि कभी ऐसी बात आए तो पुलिस व अपने किसी जागरूक दोस्त व रिस्तेदार को जरूर इसकी जानकारी दें। बताया, कोई भी दोस्त आपकी पूरी जानकारी नहीं रखता है, जितना आपका मोबाइल फोन रखता है। आपके उठने से लेकर सोने तक की हर एक गतिविधि उसे पता होती है। कब किससे बात की, क्या सर्च किया, कहां-कहां गए। हम कोई साइट सर्च करते हैं तो दो घंटे के भीतर ही आपके सोशल मीडिया पर उससे जुड़ी सैंकड़ों चीजें दिखाई देने लगेगी।
बदले जा रहे ठगी के तरीके-
सायबर सेल के प्रदीप मिश्रा ने पेंशनरों को बताया,पहले ईकेवायसी के नाम पर ठगी होती थी। अब ठगों ने तरीका बदल लिया है। कोई परिचित या रिश्तेदार बनकर आपके खाते में पैसा डलवाने की बात कहकर चूना लगा देता है। असल में राशि भेजने की नहीं वरन प्राप्त करने की रिक्वेस्ट भेजता है। इस पर हमें यूपीआई का पिन नंबर डालने को बोला जाता है। किसी भी भुगतान में जिसे भुगतान किया जाना होता है उसकी यूपीआई पिन की जरुरत ही नहीं होती है। भेजने वाला अपनी यूपीआई पिन डालता है और पैसा ट्रांसफर हो जाता है। इससे पर सतर्कता बरतना आवश्यक है।
इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा-
*एटीएम बूथ पर किसी अनजान व्यक्ति से सहायता न लें, आवश्यकता हो तो किसी रिश्तेदार को साथ ले जाएं।
*किसी संस्थान के कस्टमर केयर से संपर्क के लिए उसकी अधिकृत वेबसाइट का उपयोग करें, सर्च इंजन से नंबर लेकर संपर्क न करें।
*बैंक, बीमा कंपनी या किसी अन्य संस्थान से फोन, एसएमएस या ईमेल द्वारा मांगी गई जानकारी को सीधे संबंधित कार्यालय से ही सत्यापित करें।
*जीवन बीमा पॉलिसी के नाम पर बोनस या किसी अन्य प्रलोभन हेतु मांगी गई प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्जेज न भरें, सीधे अधिकृत प्रतिनिधि से संपर्क करें।
*पुलिस या जांच एजेंसी के नाम पर पैसे मांगने वाले किसी भी कॉल से सावधान रहें, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती।
*सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफाम्र्स पर इन्वेस्टमेंट, टास्क या ट्रेडिंग के नाम पर किसी भी ठगी से सावधान रहें।
*किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या ठगी का शिकार होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 या सीधी पुलिस को सूचित करें।
पत्रिका द्वारा सायबर फ्रॉड को लेकर शुरू किया गया यह अभियान सराहनीय है। आज हम पेंशनर्स के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में कई सायबर फ्रॉड से बचने कई नई जानकारी मिली।
देवीचरण शर्मा, जिलाध्यक्ष प्रोगेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन
इस डिजिटल युग में सायबर फ्राड को लेकर नित नए किस्से सुनने को मिल रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। पत्रिका ने सायबर सेल के सहयोग के सहयोग से अच्छा अभियान शुरू किया है।
यज्ञ नारायण मिश्रा, पेंशनर
सायबर फ्राड के नित नए नए तरीके सामने आ रहे हैं। हम लोगों तक जानकारी नहीं मिल पाती है, यह अभियान समाज को सायबर फ्रॉड से बचने में अत्यंत सहयोगी सावित होगा।
दिवाकर सिंह सेंगर, पेंशनर
हमारी गाढ़ी कमाई पर सायबर फ्राडों की निगाह है। पत्रिका के इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम से लोग जागरूक होंगे। पुलिस की सायबर सेल टीम के साथ यह कार्यक्रम जगह-जगह आयोजित होने चाहिए।
बृजवासी लाल वर्मा, पेंशनर
आज इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से वाइस चेंजिग ऐप, डिजिटल गिरफ्तारी जैसे कई नए सायबर फ्राड की जानकारी प्राप्त हुई। पत्रिका का यह अभियान सराहनीय है।
आरएम गुप्ता, पेंशनर
इस डिजिटल युग में बिना मोबाइल के रह पाना मुस्किल है। सभी आयु वर्ग के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। इसी से सायबर फ्राड भी हो रहा है। पत्रिका ने सायबर फ्राड से जागरूकता को लेकर अच्छा अभियान शुरू किया है।
आरआर चौबे, पेंशनर