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विधि विधान से हुई भगवान चित्रगुप्त की पूजा

पूजा पार्क स्थित चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थ समाज द्वारा किया गया सामूहिक पूजा का आयोजन, परंपरागत तरीके से की गई कलम-दवाद की पूजा

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सीधी। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज के साथ भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि विधान से की गई। शहर के कायस्थ समाज के लोग पूजा पार्क स्थित चित्रगुप्त मंदिर में एकत्रित हुए, जहां भगवान चित्रगुप्त की विधि विधान से पूजा अर्चना व महाआरती की गई। इसके साथ ही नए खाताबही, कलम-दवाद का पूजन किया गया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चित्रगुप्त महाराज ब्रह्म देव की काया यानि शरीर से उत्पन्न हुए थे, इसलिए उनको कायस्थ कहा जाता है। ब्रह्म देव ने उनको सभी जीवों के कर्मों का लेखा जोखा रखने का उत्तरदायित्व दिया है, चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर उनकी आराधना करने से बुद्धि, विद्या और लेखन में महारत हासिल होती है। इस अवसर पर मुख्य रूप से कायस्थ समाज के जिलाध्यक्ष एड.जेपी श्रीवास्तव, केके श्रीवास्तव, ओपी श्रीवास्तव, रमेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, विष्णु खरे, राघवेंद्र खरे, राजेंद्र खरे, वीरेंद्र खरे, अनिल श्रीवास्तव सहित अन्य चित्रांश बंधु उपस्थित रहे।

जिले में हर्षोल्लास मनाया गया भाई दूज का त्यौहार
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार रविवार को जिले में भर में हर्षोल्लास मनाया गया। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना की। वहीं भाई शगुन के रूप में बहन को उपहार दिए। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज से वचन लिया था, उसके अनुसार भैया दूज मनाने से यमराज के भय से मुक्ति मिलती है और भाई की उम्र व बहन के सौभाग्य में वृद्धि होती है। भैया दूज के दिन बहनें अपने भाई को घरों में बुलाया, माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी और फिर कलाइयों में रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद माखन-मिश्री से भाई का मुंह मीठा कराया।