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दुश्मन का मर्डर करके भोले का भक्त बना राजस्थान का यह गैंगस्टर

Gangster raju theth history

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सीकर. राजस्थान का गैंगस्टर राजू ठेहट जितना खतरनाक है, उतना ही शातिर भी है। यह अपने दुश्मनों को मौत के घाट उतारने में कतई गुरेज नहीं करता। इसके एक इशारे पर गिरोह के सदस्य लूट, मारपीट, फायरिंग व हत्या तक की वारदातों को अंजाम दे डालते हैं।

 

 

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खुद राजू ठेहट के हाथ कइयों के खून से रंगे हुए हैं। 15 अक्टूबर 2018 को राजू ठेहट को सीकर जिले के बहुचर्चित विजयपाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। विजयपाल हत्याकांड में सीकर कोर्ट द्वारा राजू ठेहट व उसके साथी मोहन मांडोता को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के साथ ही इस केस की रोचक कहानी भी एक बार फिर से लोगों की जुबां पर है।

 

raju theth Sikar की कहानी की शुरुआत होती है मई 2005 से। दरअसल राजू ठेहट गैंग की विजयपाल से दुश्मनी थी। नतीजतन राजू ठेहट व मोहन मांडोता आदि ने 22 मई 2005 को सीकर जिले के रानोली इलाके में विजयपाल व उसके साथी भंवरलाल से मारपीट, जिसमें विजयपाल की मौत हो गई। भंवरलाल गंभीर रूप से घायल हो गया था। आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने इनकी तलाश शुरू कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद राजू ठेहट व मोहन मांडोता फरार हो गए।

दोनों ने आसाम, बंगाल, महाराष्ट व झारखण्ड में फरारी काटी और इसी दौरान भगवान शिव की भक्ति शुरू कर दी। इस बात का पता तब चला जब राजस्थान एटीएस को राजू ठेहट व मोहन मांडोता के झारखण्ड के देवधर में होने की भनक लगी।

एटीएस ने देवधर में दोनों के संभावित ठिकानों पर दबिश देनी शुरू की तो ये कावंड़ लाते मिले। राजस्थान एटीएस ने दोनों को देवधर से 16 अगस्त 2013 को कावंड़ लाते समय ही गिरफ्तार किया था।



भंवरलाल की गवाही ने दिलाई सजा


घटना जून 2005 की थी। आरोपित आठ साल बाद गिरफ्तार हुए। इस दौरान अनेक सबूत व साक्ष्य नष्ट हो गए। पूरे मामले में विजयपाल के साथी भंवरलाल की गवाही ही फैसले का मुख्य आधार बनी। वह कभी अपनी बात से नहीं मुकरा। हमले में खुद भंवरलाल भी घायल हो गया था।

वह गवाही नहीं दे सके, इसलिए उसे धमकाया गया था। हमले का प्रयास भी किया गया था, लेकिन चश्मदीद गवाह भंवरलाल अडिग रहा। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल तेरह गवाहों के मौखिक बयान कराए गए। दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में 34 दस्तावेजी साक्ष्य प्रदर्शित किए गए।