रुनीजा. आज देश के कोने-कोने से कावड़ लेकर यात्री शिव मंदिरों के साथ साथ कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार उज्जैन पहुंच रहे हैं। ऐसी एक कावड़ यात्रा जो विगत 48 वर्षों से लगातार महेश्वर से महाकालेश्वर उज्जैन आती हैं।
यात्रा में रुनीजा, माधवपुरा, चामुण्डाधाम गजनीखेड़ी, खरसौदकलां सहित गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों के कावड़ यात्री 21 अगस्त से महेश्वर से माता नर्मदा का जल भरकर 500 से भी अधिक यात्री यात्रा संयोजक कमल चौधरी के सानिध्य में बोल कावडिय़ा बोल बम के जयकारों के साथ उत्साह रवाना हुए जो 28 अगस्त सोमवार को उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल का अभिषेक कर दर्शन लाभ लेंगे। कमल चौधरी व गजनीखेड़ी के हेमराज चावड़ा ने बताया, प्रथम बार वर्ष 1976 में पांच यात्रियों ने महेश्वर से उज्जैन तक शुरू की थी। उसे समय कोई भी साधन नहीं था। पांव में छाले हो जाते थे, खाने-पीने के लिए रास्ते में कोई जगह नहीं थी। 5 व्यक्ति से शुरू हुई यात्रा 5000 तक जा पहुंची। यात्रा को धार निवासी मंगल गुरु ने शुरू की थी। आज यात्री उन्हें ओम मंगल गुरु के नाम से जानते हैं। उनका स्वर्गवास 30 मई 2022 हो गया, लेकिन उनकी चलाई यह यात्रा आज भी सतत चल रही है। यात्रा में रुनीजा, गजनीखेड़ी सहित आसपास के 15-20 कावड यात्री यात्रा का आनंद ले रहे जिनमें प्रमुख रूप से हेमराज चावड़ा जो माइक संचालन व्यवस्था देखते हैं के साथ हितेंद्रसिह, विशाल सेन, राकेश सेन, हरिओम पाटीदार, रविराज सुनारिया, अशोक डोडिया, लखन सिंगाड़, प्रकाश डोडिया, सचिन मईड़ा, पप्पू राजावत, लाला चावड़ा, निरंजन पाटीदार आदि साथ चल रहे हैं।