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वाराणसी

न चांसलर न वाइस चांसलर, कुलसचिव के सहारे चल रहा BHU

मियाद हुई पूरी विदा हुए वीसी जीसी त्रिपाठी पर BHU को नहीं मिला कुलपति। विदायी समारोह में हंगामा, वीसी गिनाईं खामियां।

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वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यलाय में न चांसलर हैं न वाइस चांसलर। करीब साल भर से अधिक का वक्त गुजर गया मानव ससाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यलाय के लिए चांसलर की नियुक्ति नहीं कर सका। डॉ कर्ण सिंह का कार्यकाल पूरा हुए साल भर से अधिक का वक्त गुजर गया। अब तो पिछले दो महीने से इस विश्वविद्यलाय में कुलपति भी नहीं हैं। पहले कुलपति का विज्ञान जारी करने में विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद विलंब किया। उसके बाद से एमएचआरडी ने सर्च कमेटी गठित करने में देरी की। सर्च कमेटी गठित हो गई पर वह अभी नए वीसी के लिए तीन सौ से ज्यादा आवेदनों की स्क्रीनिंग में जुटी है। ऐसे में विश्वविद्यालय को कुलसचिव चला रहे हैं। कब नया वीसी आएगा यह अभी तय नहीं है। कारण कि पहले सर्च कमेटी प्राप्त आवेदनों के आधार पर वीसी का पैनल तैयार करेगा। वह पैनल विजिटर (राष्ट्रपति) को भेजा जाएगा और राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही नए वीसी की नियुक्ति होगी।

बता दें कि गत सितंबर में बीएफए की छात्रा संग हुई छेड़खानी के बाद गर्म हुए विश्वविद्यलाय के माहौल, वीसी प्रो जीसी त्रिपाठी के बार-बार बदलते बयान और उनके द्वारा लिए गए निर्णयों के बाद एमएचआरडी ने उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने तक अवकाश पर भेज दिया। ऐसे हालात में जब विश्वविद्यालय में विगत तीन साल से कोई रेक्टर न हो तो कार्यवाहक वीसी का दायित्व कुलसचिव को सौप दिया गया। हालांकि यह दायित्व 26 नवंबर तक ही था। कारण कि 26 नवबर ही कुलपति प्रो. त्रिपाठी के तीन साल के कार्यकाल की अंतिम तिथि थी। ऐसे में सूत्र बताते हैं कि फिलहाल कुलसचिव का बतौर कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल को भी विस्तार नहीं मिला है। यानी इस वक्त यहां कोई कुलपति है ही नहीं। ऐसे में अब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ही कहने लगे हैं कि सुना था कि कई स्कूल ऐसे हैं जो बिना प्रधानाध्यापक और इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य विहीन हैं पर अब तो इस सरकार में विश्वविद्यालय भी कुलपति विहीन हो गया है।

इस बीच बतौर कुलपति प्रो. त्रिपाठी अपने कार्यकाल के अंतिम दिन 26 नवबर को विश्वविद्यालय पहुंचे। दरअसल उन्हें विश्वविद्यालय के उनके खास लोगों ने आमंत्रित किया था विदायी देने के लिए। ऐसे में सितंबर में हुए बवाल के बाद छुट्टी पर भेजे जाने के बाद वह दूसरी बार परिसर में आए थे। इससे पूर्व वह कार्तिक अमावश्य की रात (दीपावली) को आए थे तब वह लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद अपनों के बीच कुछ वक्त गुजराने और उन्हें कुछ आश्वासन दे कर चले गए थे। लेकिन तब यह किसी को कयास भी न था कि एमएचआरडी द्वारा लंबी छुट्टी पर भेजे जाने के बाद के वक्त में उन्हें अपने किए पर कुछ पछतावा भी हो रहा है। लेकिन रविवार को जब पूरा शहर नगर निगम चुनाव में व्यस्त था तब उनकी विदायी हुई। इस मौके पर जो उन्होंने कहा वह कम चौंकाने वाला नहीं। उन्होंने अपने संबोधन में जहां तमाम अपनी उपलब्धियां गिनाईं वहीं यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ अयोग्य लोगों की नियुक्ति की, कुछ अयोग्य लोगों को आगे बढ़ाया। अब सोमवा को विश्वविद्यालय खुलते ही उनका यह बयान परिसर सहित पूरे शहर में वायरल हो रहा है। यही नहीं उनके कार्यकाल में मुंह सिल लेने वाले प्रोफेसर और तत्कालीन विभागाध्यक्ष अब सोशल मीडिया पर उनके इस बयान को वायरल कर रहे हैं। वह भी बाकायदा उनकी फोटो और उनके बयान के साथ। इतना ही नहीं ऐसे प्रोफेसर अपनी पीड़ा को भी साझा कर रहे हैं। एक तरह से प्रो त्रिपाठी का बयान आज हास्यास्पद हो गया है।

वहीं वीसी विरोधी छात्रों का वह गुट भी रविवार को खुल कर परिसर की सड़कों पर उतरा और जम कर उनके खिलाफ नारेबाजी की। वीसी जीसी गो बैक, वीसी जीसी वापस जाओ के नारे लगे। सुरक्षाकर्मियों के साथ विरोध करने वाले छात्रों से झड़प भी हुई। बता दें कि करीब दो महीने से ज्यादा समय से छुट्टी पर चल रहे बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी अपने कार्यकाल के अंतिम दिन परिसर पहुंचे। बताया जाता है कि सात गाड़ियों के काफिले संग प्रो त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के हैदराबाद गेट से परिसर में प्रवेश किया। बता दें कि दीपावली की शाम भी वह इसी रास्ते से परिसर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि प्रो त्रिपाठी के साथ अलग अलग गाड़ियों से करीब 30 लोग बीएचयू वीसी लॉज पहुंचे थे। कुलपति के आने की सूचना पूरे परिसर में आग की तरह फैल गई। सूचना मिलते ही छात्रों ने हंगामा कर दिया। दरअसल बीएचयू अधिकारियों की तरफ से कुलपति का विदाई समारोह केएन उडप्पा सभागार में शाम पांच बजे से आयोजित किया गया था। इस समारोह में केवल मेडिकल छात्रों को ही प्रवेश की अनुमति थी।

देखते ही देखते केएन उडप्पा सभागार के बाहर छात्रों की भीड़ उमड़ने लगी। बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया तो माहौल और तल्ख हो गया। छात्र कुलपति के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। सैंकड़ों की संख्या में जुटे छात्रों ने कुलपति गो बैक के नारे लगाए। बाहर छात्र धरना प्रदर्शन करते रहे और अंदर बीएचयू कुलपति का विदाई कार्यक्रम चलता रहा। विश्वविद्यालय में छात्रों के रुख को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मौके पर लंका थाना भी पहुंच गई थी।