
मौसम के आगे किसान असहाय, न फसल काट पा रहे न बचा पा रहे
विदिशा। जिले में इस बार मौसम की प्रतिकूलता किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। करीब 12 दिन के बीच दूसरी बार फसलें बारिश का सामना कर रही है। खेतों में कहीं फसल पक चुकी तो कहीं पकने की तैयारी में है लेकिन बिगड़ते मौसम के आगे किसान असहाय है। करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई का इंतजार है। किसानों का कहना है कि जिले में गेहूं का रकबा सर्वाधिक है और इसमें शरबती व गेहूं की 1544 बैरायटी पर ज्यादा असर पड़ेगा। दाने की चमक चली जाने पर प्रति िक्ंवटल पर 1 हजार रुपए तक का नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है।
मालूम हो कि 12 दिन पूर्व बारिश, तेज हवा और कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने जैसी िस्थति के बीच खेतों में फसलें आड़ी हो गई थी। इसमें जिले के करीब 423 गांव में फसलों को नुकसान होना सामने आया और जिले में करीब 10.7 एमएम बारिश दर्ज हुई थी। खेतों में गेहूं की फसल बिछ गई तो वहीं चना, मसूर, सरसों आदि की फसल को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद फिर मौसम दूसरा झटका इन फसलों को झेलना पड़ा है और दो दिन पूर्व ही जिले में 9.3 एमएम बारिश दर्ज हुई है। मौसम अभी भी कुछ दिन के लिए ठीक नहीं माना जा रहा है। ऐसे में किसानों की चिंता लगातार बनी हुई है। किसानों का कहना है कि एक माह की िस्थति में फसल काफी अच्छी थी और काफी बेहतर पैदावार की उम्मीद बन रही थी लेकिन इन 15 दिनों में मौसम के बदलाव ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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जिले में गेहूं का सर्वाधिक रकबा
जिले में रबी फसल का कुल रकबा 5 लाख 28 हजार है। इसमें सर्वाधिक 3 लाख 42 हजार हैक्टेयर में गेहूं है। इसलिए इस फसल में ज्यादा नुकसान होना किसान मान रहे हैं। ग्राम गोबरहेला के किसान बृजकिशोर राठी का कहना है कि असिंचित क्षेत्र और जहां बोर आदि से सिंचाई के साधन हैं उन क्षेत्रों में अधिकांशत: शरबती एवं गेहूं 1544 किस्म मुख्य फसल में रहती है। इसका रकबा किसान करीब 1 लाख हैक्टेयर हैं। उन्होंने बताया कि मंडी में इन किस्मों के दाम 3 हजार रुपए प्रति िक्ंवटल तक मिलते हैं लेकिन बारिश की मार पड़ने से इन फसलों के दानों की चमक चली जाएगी और इससे भाव में करीब 1 हजार रुपए प्रति िक्ंवटल तक का नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है। वहीं गेहूं की अन्य फसलें जो आड़ी हो गई उनमें दाना पतला रह जाएगा और इससे वजन कम होगा एवं पैदावार भी प्रभावित होगी।
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चना की सेहत भी ठीक नहीं,मसूर, सरसों की चल रही कटाई
वहीं जिले में चना फसल की भी अभी कटाई रुकी हुई है। यह चना फसल भी खेत में आड़ी हो चुकी जिससे पौधे के नीचे की चने की घेटियाें में दाना पतला हो जाएगा। वहीं मिट़टी व पानी के कारण इस हिस्से की फसल खराब हो रही है। वहीं मसूर और सरसों की कटाई का कार्य तेजी से चल रहा है। गेहूं कटाई में किसानों को मौसम खुलने का इंतजार है।
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टूट गए सपने-बघेल
ग्राम लोधाखेड़ी के किसान जसवंतसिंह बघेल का कहना है कि फसल पर इस मौसम की मार से सारे सपने टूट गए हैं। 40 बीघा में शरबती फसल थी जो पिछले दिनों चली तेज हवा पानी से खेत में बिछ गई। इस 40 बीघा में 450 िक्ंवटल फसल आने का अनुमान था, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा से करीब 100 िक्ंवटल तक पैदावार घटेगी। उन्होंने बताया कि परिवार में शादी है। बैंक, सेठ-साहूकारों का कर्ज चुकाना है। ट्रेक्टर की किस्त जमा करना है। दवा दुकानों की भी उधारी देना है, लेकिन फसल नुकसान से सारे सपने ध्वस्त हो गए और फिर कर्ज लेने की नौबत बनेगी। यह िस्थति अकेले जसवंत सिंह की ही नहीं। अधिकांश किसान इस हालत में आ गए हैं।
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वर्जन
जिले में 10 से 12 प्रतिशत कटाई का कार्य हो चुका है। मौसम खुलते ही कटाई का कार्य जोर पकड़ेगा और करीब 10 अप्रैल तक जिले में सभी फसलों की कटाई होने की संभावना है।
-महेंद्र ठाकुर, सहायक संचालक, कृषि
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Published on:
22 Mar 2023 02:41 am
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