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ज्योतिष की दृष्टि से कैसी है ये हरियाली अमावस्या जाने?

ज्योतिष की दृष्टि से कैसी है ये हरियाली अमावस्या जाने?

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ज्योतिष की दृष्टि से कैसी है ये हरियाली अमावस्या जाने?

विदिशा. सावन के महीने में हरियाली और प्रकृति पूजन को समर्पित तीज त्यौहारों में हरियाली अमावस्या प्रमुख है। इस मौसम में हरियाली का अति मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। बारिश के कारण पूरे शहर की धूल, पानी में धुल जाती है। साथ ही गर्मी में झुलसे पेड़ों को श्रावण मास में नया जीवनदान मिलता है। इसलिए सावन मास की अमवस्या बहुत खास मानी जाती है।

इस बार यह अमावस्या 11 अगस्त शनिवार को पड़ रही है, इसलिए हरियाली और शनिचरी अमावस्या साथ-साथ होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। इसके साथ ही इस अमवस्या पर शुभ चतुर्ग्रही संयोग भी है।
ज्योतिषाचार्य पं. राजीव लोचन पांडेय ने बताया कि इस वर्ष की हरियाली अमावस्या ज्योतिष की दृष्टि से बहुत शुभ है। यह शुभ संयोगों वाली भी रहेगी, क्योंकि इस शनिचारी हरियाली अमावस्या पर कर्म राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और राहु ग्रह एक साथ रहेंगे।

जबकि मंगल और केतु मकर राशि में रहेंगे। शुक्र नीच राशि कन्या में रहेंगे। हरियाली अमावस्या के साथ ही शनिचरी अमावस्या होने के कारण यह संयोग शिव और शनि की कृपा प्राप्त करने का उत्तम साधन रहेगा। पं. पांडेय के अनुसार ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्मों का फल देने का अधिकारी ग्रह माना गया है। वर्तमान में वृश्चिक, धनु और मकर राशियों पर शनि की साढ़े साती ओर वृषभ और कन्या पर शनि की ढैया चल रही है। इस लिए शनि पूजा का विशेष महत्व है।

वृक्षों की पूजा का खास महत्व
इस दिन वृक्षों की पूजा का खास महत्व होता है। इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। साथ ही इसके फेरे भी लिए जाते हैं। आपको बता दें कि पीपल ही एक ऐसा पेड़ ही जो हमें 24 घंटे प्राणवायु देता है। साथ ही बरगद, नींबू, तुलसी, केला आदि की पूजा करना भी शुभ होता है। यह पर्व वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है।