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एनआरजीएस केन्द्र हुआ फुल, नंबर में लगे चार बच्चे

एनआरजीएस केन्द्र हुआ फुल, नंबर में लगे चार बच्चे
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एनआरजीएस केन्द्र हुआ फुल, नंबर में लगे चार बच्चे

विदिशा/गंजबासौदा। शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में लगातार कुपोषण बढ़ता जा रहा है। जैसे ही कुपोषण के शिकार बच्चे मिलते हैं उन्हे एनआरजीएस केन्द्र में लाकर भर्ती करा दिया जाता है लेकिन एनआरजीएस केन्द्र में केवल १० बच्चों को भर्ती कर इलाज की सुविधा है यदि १० बच्चों के ऊपर आते हैं तो उन्हे वेटिंग में रखकर तारीख दे दी जाती है और तारीख के आधार पर उनका उपचार आगे किया जाता है। लेकिन जब तक केन्द्र में भर्ती बच्चों की अस्पताल से छुट्टी नहीं होती है तब तक एनआरजीएस केन्द्र में वेटिंग में लगे बच्चों को उपचार नहीं मिल पाता है।

रविवार को एनआरजीएस केन्द्र में इलाज के लिए चार बच्चे आए। लेकिन एनआरजीएस केन्द्र में पूर्व से १० बच्चे भर्ती हैं जिसके चलते उन बच्चों को इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से बच्चों को १२ तारीख के बाद भर्ती करने का कहा गया है। कुपोषित बच्चों को यदि समय पर इलाज नहीं मिला तो कुपोषण कम होने की वजाय निरंतर बढ़ता चला जाएगा। जिससे कई और भी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नागरिकों ने मांग की है कि बच्चों को जल्द उपचार दिलाया जाए।

पैसा खर्च करने के बाद भी बढ़ रहा कुपोषण
शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और लाखों रूपए खर्च भी किए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी कुपोषण कम होने की वजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। शासन पैसा तो खर्च करता है लेकिन बच्चों को जो सुविधाएं उसकी वजह से मिलना चाहिए। वह नहीं मिल पाती हैं। क्योंकि पैसा खर्च कुछ होता है और विभागीय आंकड़ों में कुछ और दर्शाया जाता है।

यहां तक कि शासन के निर्देश पर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार ने भी कुपोषित बच्चे गोद लिए थे। लेकिन गोद लेने के बाद एक दो बार तो उन बच्चों की स्थिति जांची गई और फिर जैसे ही समय गुजरा वैसे ही उन बच्चों को देखने वाला कोई नहीं बचा। वह बच्चे भी जो प्रशासनिक अधिकारियों ने गोद लिए हैं। उनकी स्थिति भी ठीक नहीं हैं और रिकार्ड में वह बच्चे अधिकारियों के गोद लिए बच्चों के नाम से दर्ज हैं।

बच्चों के इलाज की होगी व्यवस्था: डीएम
नवागत कलेक्टर कोसलेन्द्र विक्रम सिंह ने पत्रिका से चर्चा में बताया कि सीएमएचओ और अस्पताल प्रबंधन से बात करके बच्चों के इलाज की व्यवस्था कराई जाएगी। साथ ही यदि ज्यादा बच्चे आएं तो उन्हे किस तरीके से एनआरजी केन्द्र में शिफ्ट किया जा सकता है उस केन्द्र की केपेसिटी बढ़ाने की व्यवस्था शीघ्र कराई जाएगी जिससे कि समय पर कुपोषित बच्चों को इलाज मिल सके। साथ ही एक बार और कुपोषित क्षेत्रों की जांच पड़ताल कराकर बच्चों को इलाज के लिए भिजवाया जाएगा।