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तीन सौ साल पुरानी जगदीश रथयात्रा पर इंद्र देव आज भी करते हैं जलाभिषेक, यहां आषाढ़ में दिखती है दीवाली सी धूम

कदम कदम पर खूबसूरत रंगों और फूलों से तैयार रंगोली गांव की हर सड़क को रंगीन कर देती है, महिलाएं, युवतियां हाथों में आरती और प्रसाद के थाल लिए अपने प्रिय भगवान जगदीश की रथ यात्रा का बेसब्री से इंतजार करती नजर आती हैं। हर सड़क पर भक्तों की आंखें भगवान के दर्शन को बेताब सी टकटकी लगाए दूर तक देखने की कोशिश करती दिखती है जैसे कह रही हों दर्शन दो भगवान...

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विदिशा। आषाढ़ का महीना आते ही मप्र के विदिशा जिले के एक गांव में दीवाली जैसी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। गली-मोहल्ले का हर घर साफ और रंग-रोगन के साथ चमकता नजर आता है। कदम कदम पर खूबसूरत रंगों से रंगोली गांव की हर सड़क को रंगीन कर देती है, महिलाएं, युवतियां हाथों में आरती और प्रसाद के थाल लिए अपने प्रिय भगवान जगदीश की रथ यात्रा का बेसब्री से इंतजार करती नजर आती हैं। हर सड़क पर भक्तों की आंखें भगवान के दर्शन को बेताब सी टकटकी लगाए दूर तक देखने की कोशिश करती दिखती है जैसे कह रही हों दर्शन दो भगवान...

कुछ ऐसा ही नजारा होता है आषाढ़ सुदी दूज पर जिले के मानोरा गांव का। इस दिन यहां भगवान जगदीश की रथयात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है। रथयात्रा से ठीक एक दिन पहले मानोरा मेला भरता है। इस बार यह मेला 19 जून सोमवार से शुरू होगा। तो 20 जून की सुबह भगवान जगदीश रथयात्रा पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकल पड़ेंगे। पलक-पावड़े बिछाए भगवान के दर्शन करने वाले भक्तों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आते हैं। उनके हाथ उनकी आरती करते नहीं थकते। वे कहते हैं अहो भाग्य हमारे कि हमे दर्शन देने भगवान खुद पधारे। यात्रा को लेकर लोगों की श्रद्धा देखते बनती है। माना जाता है कि जगदीश स्वामी के दर्शन कर लोग मन्नत मांगते हैं और उसके पूरा होने पर वे मीलों दूर से पिण्ड भरते हुए आते हैं। आस्था का यह क्रम तेज धूप, गर्मी और बारिश में भी नहीं थमता।

संकरी गलियों में उमड़ता है भक्ति का सैलाब
भगवान जगदीश की रथयात्रा देखने के लिए गांव की संकरी गलियों में भक्ति का रंग ऐसा बिखरता है कि हर किसी को अपने रंग में रंग देता है। श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है और रास्ते भर लोग सड़कों पर रंगोली बनाकर, कलश रखकर, दीप जलाकर और आरती और प्रसाद की थाली सिर पर रखकर भगवान के आने का इंतजार करते हैं।

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सारी तैयारियां पूरी
रथयात्रा के लिए मानोरा की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मेले में दुकानें सजने लगी हैं, मंदिर परिसर रंग रोगन से दमकने लगा है और रथयात्रा के लिए हर सड़कों का डामरीकरण हो चुका है और वह साफ-सुथरी होकर चमक रही हैं। घर-घर में लिपाई पुताई के बाद दीवाली मनाने जैसा खुशियां महसूस हो रही हैं। बस अब लोग रथ पर सवार भगवान के दर्शन करने को बेताब हैं।

300 साल पुरानी परम्परा
मानोरा में जगदीश रथयात्रा की परम्परा करीब तीन सौ साल पुरानी है। यहां भगवान को लाने का श्रेय जगदीश भक्त तरफदार मानिकचंद और उनकी पत्नी पद्मावती को जाता है। मान्यता है कि उनको दिया वचन निभाने भगवान रथयात्रा के दिन हर साल मानोरा पधारते हैं। इस दिन दूर-दूर से लाखों लोग पहुंचकर रथ में सवार भगवान जगदीश स्वामी, बलदाऊ और देवी सुभद्रा के दर्शन करते हैं। यहां लोगों की मान्यता है कि रथयात्रा के दिन मानोरा में बारिश जरूर होती है और यह बारिश मौसमी नहीं बल्कि इसलिए होती है कि भगवान इंद्र भी जगदीश स्वामी का जलाभिषेक करते हैं।

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25 लाख से हुआ मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण
जगदीश स्वामी ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवान सिंह रघुवंशी बताते हैं कि रथयात्रा के पूरे प्रबंध हो चुके हैं। मंदिर में करीब 20 से 25 लाख रुपए की लागत से निर्माण कार्य हुए हैं। लाल पत्थरों से बने प्रवेश द्वार और अन्य निर्माण कार्य की रंगाई-पुताई भी आकर्षक की गई है। पूरा परिसर साफ हुआ है। रविवार को रथ निकालकर उसकी साफ-सफाई और रंग-रोगन किया जाएगा।

आठ लाख का मानोरा प्रवेश द्वार
पंचायत सचिव प्रीतम कुशवाह कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों द्वारा दी गई करीब 8 लाख रुपए की राशि से मानोरा गांव में प्रवेश करते ही आकर्षक प्रवेश द्वार लाल पत्थरों का बनाया गया है। इस गेट के लिए विधायक लीना जैन ने विधायक निधि से 3.50 लाख रुपए, सांसद रमाकांत भार्गव ने 2 लाख रुपए, राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने 2 लाख रुपए की राशि दी थी। कुछ अन्य लोगों ने भी सहयोग किया है।

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रथयात्रा से पहले सडकें चमचमाईं
रथयात्रा की पूर्व तैयारियों को देखने कलेक्टर उमाशंकर भार्गव और एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने यहां ट्रस्ट, ग्रामीणों और अधिकारियों की बैठक ली थी। इसके बाद यहां मानोरा के प्रवेश द्वार से लेकर जनकपुरी के मंदिर तक के रथयात्रा मार्ग को डामरीकृत कर दिया गया है। जनकपुरी में भगवान विश्राम करते हैं। वहीं एक सीमेंटेड मार्ग क्षतिग्रस्त है, उसका काम नहीं हो सका है। सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए भी कह दिया गया है।

20 टेंकरों से पानी का इंतजाम
जनपद पंचायत सीईओ भगवान सिंह राजपूत कहते हैं कि मेले और रथयात्रा को देखते हुए हमने पेयजल के लिए 20 टेंकर का इंतजाम किया है। मेले में करीब सौ से ज्यादा दुकानें, दस से ज्यादा झूले लगाने का प्रबंध किया गया है। दुकानदार आते जा रहे हैं। प्रयास यह है कि दुकानदारों और रथयात्रा में आने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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हर घर तैयार, भगवान आते हैं हमारे घर
मानोरा के रामनाथ सिंह बताते हैं कि भगवान की रथयात्रा के लिए पूरा गांव तैयार है। यह हमारे भाग्य ही हैं कि घर बैठे भगवान हमें दर्शन देने अपने मंदिर से निकलकर आते हैं। इस रथयात्रा की बड़ी मान्यता है और दूर-दूर से लोग भगवान के दर्शन को आते हैं। पूरे गांव में लोग अपने घरों को दीपावली की तरह लीप-पोत कर सजाते हैं, बंदनवार बांधते हैं और जगदीश स्वामी का स्वागत करते हैं।

पिण्ड भरते आते हैं हजारों लोग
मान्यता के अनुसार जगदीश स्वामी के दर्शन कर लोग मन्नत मांगते हैं और उसके पूरा होने पर वे मीलों दूर से पिण्ड भरते हुए आते हैं। आस्था का यह क्रम तेज धूप, गर्मी और बारिश में भी नहीं थमता है। रथयात्रा के एक दिन पहले से पिण्ड भरते हुए लोग सडक़ों पर जय जगदीश हरे की टेर लगाते और दंडवत करते हुए मानोरा की ओर बढ़ते देखे जा सकते हैं।

डायवर्ट रहेगा मार्ग, दो किमी दूर होगी पार्किंग
मानोरा रथयात्रा के दौरान भारी भीड होने और गांव नेशनल हाईवे पर होने से यहां के भारी और हल्के वाहनों का रूट इस बार भी डायवर्ट किया जाएगा। 19 जून की शाम से रूट डायर्वट होगा। दो पहिया वाहन भी नहीं जा सकेंगे। करीब दो किमी पहले पार्किंग होगी, जहां वाहन खड़े करके लोग मानोरा जा सकेंगे। जबकि सागर से विदिशा-भोपाल और विदिशा से सागर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए मार्ग बदले जा रहे हैं।

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