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सिरोंज के सरकार हैं मदनमोहन, जुड़ी है लोगों की अटूट आस्था

राम-बलराम के रूप में होती है ठाकुर जी की पूजा

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सिरोंज के सरकार हैं मदनमोहन, जुड़ी है लोगों की अटूट आस्था

सिरोंज के सरकार हैं मदनमोहन, जुड़ी है लोगों की अटूट आस्था

विदिशा. सिरोंज में प्राचीन मदनमोहन मंदिर को सरकार के दरबार के रूप में ख्याति प्राप्त है। वे यहां के राजा माने जाते हैं और उन्हें सरकार ही कहा जाता है। यहां सबसे प्राचीन दो प्रतिमाएं हैं, जो राम-बलराम की हैं। यहां मदनमोहन सरकार को रामनंदी संप्रदाय की परंपरा अनुसार राम के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि रामदास बाबा के इस सिद्धस्थल पर चातुर्मास करने सदियों पहले संतों की टोली इन श्रीविग्रहों के साथ आई थी। वापस जाते समय ये विग्रह टस से मस नहीं हुए तो संतों ने उन्हें ईश्वर की इच्छा मानकर यहीं विराजित कर दिया था। तब से अब तक यहां सरकार के सेवक की आठवीं पीढ़ी सेवारत है।


मदनमोहन सरकार के सेवक पं. नवनीत शर्मा बताते हैं कि औरंगजेब के समय यह मंदिर एक मंजिल नीचे तहखाने में था। वहीं सरकार की प्रतिमाएं थीं। यहां ठाकुरजी की सेवा राम रूप में होती है। ये प्रतिमाएं सालिगराम शिलाओं की बनीं हैं। नेमा समाज की करीब 900 वर्ष प्राचीन लक्ष्मीनारायण प्रतिमा भी यहीं मौजूद है। अब सरकार का दरबार अत्यंत भव्य बन गया है, लेकिन हर जगह प्राचीनता झलकती है। गर्भग्रह में विराजित श्रीविग्रह एकटक होकर देखने को मन करता है। चांदी के गेट बने हुए हैं, जिन पर नक्काशी है। बाद में मंदिर परिसर में कृष्ण लीलाओं की तस्वीरें भी बना दी गईं हैं। पूरा परिसर खंबों पर टिका है। पं. नवनीत शर्मा बताते हैं कि यह गादी स्थल है, रामदास बाबा का यहां धूना है, जिसमें से वे एक सिक्का और एक टिक्का निकालते थे।

्रसरकार को चढ़ता है अमनिया
सिरोंज के मदनमोहन सरकार को भोग स्वरूप जो अर्पित किया जाता है उसे अमनियां कहते हैं। यह अमनियां विशेष रूप से दरबार में पुजारी ही सरकार को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही दरबार में अपनी अर्जी लगाने के लिए यहां श्रद्धास्वरूप एकादशी को लोग श्रीफल में अपनी अर्जियां लगाकर सरकार के दरबार में रखते हैं। भक्तों का मानना है कि यह हमारी आस्था का केंद्र है और सरकार के दरबार में हर कामना पूरी होती है।

रोचक है सरकार के दरबार की कथाएं
सरकार के सेवक पं. नवनीत बताते हैं कि यहां बालरूप में ठाकुर जी की सेवा होती है। तीनों समय की आरती में सरकार को मगध का ही भोग चढ़ता है। एक बार मगध भोग नहीं लग पाया था तो ठाकुर जी बालरूप में अपने पैर की सोने की पायल लेकर बाजार में मगध लेने चले गए थे। बाद में श्रीविग्रह के पैरों की पायल गायब देखकर तलाश हुई तो मगध विक्रेता ने कहा था कि एक बच्चा आया था इस पायल के बदले मगध लेने। इसी तरह ठाकुरजी को कभी रबड़ी तो कभी पान भी भेंट किए जाते हैं। पूरी शुद्धता से बने हर किस्म के व्यंजन यहां भोग रूप में ठाकुर को चढ़ाए जाते हैं। जन्माष्टमी, राधाष्टमी, रामनवमी, एकादशी तथा कार्तिक मास में यहां विशेष आयोजन होते हैं।