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सूरत में नंबर वन, सीरत मेें फिसड्डी हमारे अस्पताल

कायाकल्प में अवार्ड जीतने वाले अस्पतालों में न ढंग का इलाज और न मरीजोंं को सुविधाएं

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सूरत में नंबर वन, सीरत मेें फिसड्डी हमारे अस्पताल

सूरत में नंबर वन, सीरत मेें फिसड्डी हमारे अस्पताल

गोविंद सक्सेना. विदिशा. हाल ही में जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के कायाकल्प का नतीजा घोषित हुआ है। इन नतीजों में विदिशा का जिला चिकित्सालय मप्र में नंबर वन घोषित हुआ है और इसे 50 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि नटेरन और शमशाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी 3-3 लाख रुपए की राशि अवार्ड स्वरूप प्रदान की जाएगी। कायाकल्प सर्वे में मुख्य फोकस अधोसंरचना, सफाई आदि पर रहता है, और प्राय: इसमें मरीजों को मिलने वाले इलाज तथा सुविधाओं को दरकिनार कर दिया जाता है। जबकि अस्पतालों में सबसे ज्यादा जरूरी है इलाज और मरीजों को सुविधाएं। देखें सूरत में नंबर वन रहने वाले इन अस्पतालों की सीरत। उपचार और मरीजोंं की सुविधाओं में ये कितने खरे उतर रहे हैं।

जिला चिकित्सालय: लिफ्ट बंद, टॉयलेट में ताला, वाटर कूलर में गर्म पानी

माधवराव सिंधिया जिला चिकित्सालय के नाम से स्थापित इस अस्पताल में यकीनन भवन बहुत ही बढिय़ा, विशाल और सुविधाजनक है। लेकिन क्या इसे संभाल भी पा रहा है यहां का प्रबंधन। सर्वे के समय चकाचक दिखाने के अगले दिन से क्या हाल है आपको हम बताते हैं।
गर्मी के दिनों में मरीज और उनके परिजन पानी की ठंडे पानी की तलाश में रहते हैं। जिला चिकित्सालय की लिफ्ट नंबर 6 बंद पड़ी है, इससे आना जाना संभव नहीं है। इसी लिफ्ट के पास गैलरी में लगा वाटर कूलर खराब पड़ा है। यहां तपता हुआ गर्म पानी मरीजों और उनके परिजनों द्वारा ले जाने की मजबूरी है। इतना ही नहीं जहां वाटर कूलर लगाया गया है, वहां जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने से कूलर का टैंक ओवरफ्लो होकर पूरी गैलरी में पानी फैला रहा है, जहां से निकलना भी मुश्किल है। इसी गैलरी में दो टॉयलेट हैं, लेकिन मरीजों और परिजनों की सुविधा के लिए बनाए गए इन दोनों टॉयलेट में ताला लगा रहता है।

कुर्सियां टूटीं, पलंग पर चादर तक नहीं, जांच सैंपल खुले में
जिला चिकित्सालय के कक्ष क्रमांक 135 में पैथॉलॉजी सेम्पल कलेक्टन रूम है। लेकिन यहां मरीजों के यूरिन सेम्पल अंदर रखने से परहेज है। ये सेम्पल कमरे से बाहर चैनल के पास एक कोने में खुले में ही स्टूल पर रख दिए जाते हैं। किसी की भी टक्कर या सफाई करते समय ये गिरकर उनकी यूरिन पूरी फैल सकती है, इसकी चिंता किसी को नहीं। जिला चिकित्सालय के कक्ष क्रमांक 173 में संचालित पीएनसी वार्ड में कई मरीजों के पलंग पर चादर तक नहीं हैं। यहां बाहर पास ही परिजनों के बैठने के लिए लगी कुर्सियां कई दिनों से टूटी पड़ी हैं।

इलाज से असंतुष्ट मरीज छोड़ जाते हैं अस्पताल
जिला चिकित्सालय से रेफर कर दिए जाने वाले और इलाज से संतुष्ट न होने के कारण अस्पताल बीच में ही छोड़ जाने की बड़ी संख्या के कारण भी जिला चिकित्सालय हमेशा चर्चा में रहता है। इलाज के दौरान ठीक इलाज न मिलने, देखभाल न होने और उपचार से लाभ न होने की शिकायत करते हुए परेशान परिजन कई बार अपने मरीज को बिना सूचना के ही अस्पताल से बाहर ले जाकर इलाज कराने मजबूर हो जाते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या अस्पताल में बड़ी है। इसी प्रकार छोटे-छोटे मामलों में भी रिस्क न लेकर उन्हें रेफर करने की परंपरा भी यहां खूब है। हालांकि जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने अब इस तरह की जानकारी किसी को भी मुहैया कराने पर मौखिक रोक भी लगा दी है।

सीएम तक पहुंच चुकी है शिकायत
जिला अस्पताल के रवैये और यहां उपचार के नाम पर मरीजों को रेफर करने की शिकायतों समेत कई शिकायतें सीएम शिवराज सिंह चौहान तक पहुंच चुकी हैं। इस पर सीएम ने कलेक्टर उमाशंकर भार्गव को इन मामलों को बिंदूवार शामिल कर जिला चिकित्सालय से संबंधित बैठक रखवाने के लिए भी कहा था।


नटेरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र- प्रसूताओं को चादर तक नहीं
नटेरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी कायाकल्प सर्वे में तीन लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां भी हाल बेहाल है। दस बिस्तरों वाले यहां के प्रसूतिगृह में प्रसव के लिए आईं प्रसूताओं को पलंग पर बिछाने के लिए चादर, तकिया, कंबल कुछ नहीं मिलता। लखार गांव की कीर्ति जब यहां प्रसव के लिए आई तो उनकी सास गनेशीबाई ने बताया कि दो दिन से आए हैं चादर, तकिया कुछ नहीं मिला, हमें सब घर से ही लाना पड़ा है। इसी तरह पिपलधार की पूजा का भी कहना है कि अस्पताल में ओढऩे बिछाने के लिए कुछ नहीं मिला, सब घर से ही मंगाया है।