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MP Election 2023: विदिशा की लाइफ लाइन पर लगा ग्रहण, नालों के गंदे पानी से प्रदूषण बढ़ा, परिक्रमा पथ का भी नहीं हो सका निर्माण

न बेतवा नदी की सूरत बदली और न ही क्षेत्र में कोई उद्योग लग सका

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बेतवा को विदिशा की जीवनरेखा माना जाता है और उसी के पानी से विदिशा की जलापूर्ति होती है। लेकिन उसके ईकोसिस्टम को बचाने, उसे प्रदूषण से बचाने के लिए कई दशकों की मांग के बावजूद कोई पुख्ता काम नहीं बन सका। हर मंच से, पर्यावरण के हर कार्यक्रम में बेतवा की दुर्दशा की बात खूब होती रही, ज्ञापन, मांग, निवेदन भी खूब हुए लेकिन बेतवा में मिलने वाले गंदे नालों का मिलना भी आज तक नहीं रुक सका। बेतवा के किनारों पर बढ़ रहे कटाव को रोकने के लिए कोई योजना तक नहीं बन सकी। बेतवा के सौंदर्यीकरण की खूब बात हुई, लेकिन बेतवा परिक्रमा पथ तक नहीं बन सका। बेतवा के प्राचीन पुतली घाट तक जाने का रास्ता तक नहीं। बेतवा के किनारों पर अवैध कब्जे, खंतियां खोद डालने और पेड़ों को काट देने की घटनाएं रोज हो रहे है।

राजनीतिक दलों ने कई बार बेतवा नदी को अपना प्रमुख एजेंडा तो बताया जाता है लेकिन इसके जीर्णोद्धार के लिए पहल आज तक नहीं की गई है। बेतवा उत्थान समिति की माने तो चुनाव जीतने के बाद कई नेता यहां बेतवा के घाट तक भी नहीं जाते हैं। इस चुनाव में बेतवा नदी लोगों के प्रमुख मुद्दों में से एक है। उद्योगों का विकास नहीं होना भी क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में शामिल है।

रेल कारखाने का गोदाम बना वेयर हाउस

वहीं विदिशा विधानसभा क्षेत्र कृषि प्रधान होते हुए भी एक कृषि आधारित उद्योग या अन्य किसी बड़े उद्योग-कारखाने के लिए कई दशक से आस लगाए बैठा है। पिछले दशक में जगह-जगह खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने की बात खूब हुई थी, लेकिन उस पर भी अमल नहीं हो सका। तत्कालीन सांसद सुषमा स्वराज के प्रयासों से विदिशा में रेलवे अल्टीनेटर बनाने के कारखाना बनना शुरू हुआ तो विदिशा उम्मीदों से भर उठा था, लेकिन वह कारखाना करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद सिर्फ एक गोदाम बनकर रह गया, पीपीपी मोड पर इसे चलाने के प्रयास अब तक सफल नहीं हुए, नतीजा यह हुआ कि रेलवे के अल्टीनेटर बनाने के कारखाने में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेंहू-चना भंडारित किया जा रहा है। ऐसे में विदिशा फिर उद्योगों से दूर ही रहा।

उधर अरबों रुपए की लागत से जंबार-बागरी में नए औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण किया गया, लेकिन निर्माण के सात साल बाद भी वहां सात उद्योग धंधे भी नहीं शुरू हो पाए। ऐसे में विदिशा को उद्योगों की सौगात और यहां के बेरोजगारों को रोजगार की उम्मीद अब भी सिर्फ उम्मीद ही बनी हुई है, धरातल पर उम्मीदें साकार नहीं किया जा सका है। उद्योगों के अभाव के चलते विदिशा विकास की दौड़ में भी पिछड़ता जा रहा है। क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अच्छे अवसर क्षेत्र में नसीब नहीं हो पा रहे हैं। उद्योगों के अभाव में व्यापार भी एक निश्चित सीमा में आकर अटका हुआ है इसके विस्तार और विकास के लिए जरूरी है कि उद्योगों का विकास किया जाए।

इनका कहना है

- विदिशा में बेतवा का सिर्फ नाम लिया जाता है, उसके संरक्षण और उसे प्रदूषण से बचाने के लिए नेताओं ने कोई काम नहीं किया। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। क्षेत्र में एक बड़े उद्योग की भी बहुत जरूरत है, जिससे आर्थिक विकास के साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
- अतुल शाह, बेतवा उत्थान समिति

- क्षेत्र में किसानों को अपनी उपज के लिए न अच्छा बाजार मिलता है और न ही यहां कृषि आधारित कोई उद्योग। किसी नवाचार की पहल भी करें तो उपज को बेचने किसान को परेशान होना पड़ता है। एक रेल कारखाना खुला था, लेकिन उसको शुरू भी नहीं किया जा सका। उद्योगों में पिछड़े हैं हम।
- संजय राठी, प्रगतिशील किसान

- लंबे समय से बेतवा के संरक्षण, शुद्धीकरण और जल संवर्धन के लिए आवाज उठाई जा रही है। लेकिन कभी किसी जनप्रतिनिधि ने इसके लिए गंभीरता से काम नहीं किया। बेतवा से जुड़े चंद लोग ही नदी की सेवा नियमित करते हैं। ऐसे में कब तक बेतवा को बचाए रखा जा सकेगा।
- हितेंद्र रघुवंशी, पर्यावरण मित्र

- उद्योगों और कारखानों के लिहाज से विदिशा काफी पिछड़ा हुआ है। हर चुनाव में इसकी बात उठती है, मांग होती है, आश्वासन भी मिलते हैं, लेकिन किसी ने भी या तो गंभीरता से अब तक प्रयास किए नहीं, या फिर प्रयास सफल नहीं हुए। एक रेल कारखाना मिला था, लेकिन वह भी गोदाम बना दिया गया।
- रवि तलरेजा, चैम्बर ऑफ कॉमर्स

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