
शहर के पास शैलाश्रय, प्रकृति और देवस्थलों का संगम
विदिशा. शहर से करीब 10 किमी दूर ही शैलाश्रय, प्रकृति और देवस्थलों का अनूठा संगम है, लेकिन वह बहुत से लोगों के लिए अंजान सा है। लेकिन जंबार की पहाड़ी से लगभग सभी लोग परिचित हैं। इसी पहाड़ी की तलहटी में जमीन से करीब 10 फीट ऊंचाई पर शैलाश्रय लोगों को आकर्षित करते हैं। निमखिरिया के रास्ते में ये शैलाश्रय अब देवालय के रूप में उपयोग हो रहे हैं। बड़ी विशाल चट्टानों की छांव में यहां धूप और बारिश से भी खूब बचा जा सकता है। यहां भैरव जी का स्थान ग्रामीण बताते हैं, जबकि पहाड़ी के अंदर गुफा नुमा स्थान को अब मंदिर का रूप दे दिया गया है। मूल रूप से यह भी शैलाश्रय ही है, जहां गुफा जैसा स्थान है, लेकिन वहां सिद्ध बाबा को स्थापित कर बाहर चैनल गेट लगा दिया गया है और अब यहां नियमित पूजा होती है। इसके आसपास का स्थान चट्टानों के चबूतरे की तरह विशाल और सुरक्षित है। उम्मीद है कि इस पहाड़ी के कुछ शैलाश्रयों पर शैलचित्र भी हो सकते हैं, क्योंकि जाफरखेड़ी की पहाड़ी पर पूर्व में शैलचित्रों की मौजूदगी का खुलासा पत्रिका ने ही किया था। हालांकि वहां लगातार पहाड़ की खुदाई और पत्थरों के उत्खनन और प्रशासन की लापरवाही के कारण आदि मानव द्वारा बनाए गए ये शैलचित्र और आदि मानव के ये प्राकृतिक आवास अब नष्ट से हो गए हैं। शहर के नजदीक अभी जंबार की पहाड़ी के ये शैलाश्रय सुरक्षित हैं। पास ही पानी से लबालब तालाब भी देखने लायक है। लेकिन अगर इस क्षेत्र, पहाड़ी और शैलाश्रयों की भी देखरेख नहीं की गई तो कुछ ही अर्से बाद ये भी गायब हो जाएंगे।
Published on:
05 Nov 2021 09:07 pm
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