
ऐरण
विदिशा/मंडीबामोरा. ऐतिहासिक ऐरण बत्तीसी क्षेत्र वर्षो से प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। यहां किसी भी दिशा से न तो पहुंच मार्ग बन सका है और न ही कोई सार्वजनिक साधन है। जिससे ऐरण तक पहुंचा जा सके। वहीं बारिश में पुल पर पानी आ जाने पर यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में देश और विदेश के पर्यटकों का आना पूरी तरह बंद हो जाता है।
मंडीबामोरा से लगभग 10 किमी दूर बीना नदी के किनारे बसा ऐरण गुप्त वंश के काल का पुरातात्विक महत्व का ऐतिहासिक स्थल है। इसका इतिहास लगभग 5 हजार साल पुराना बताया जाता है। वर्तमान में मंडीबामोरा से ऐरण पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। जो सड़क है उस पर रेहटी नदी की दशकों पुरानी पुलिया से होकर जाती है, जो पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। ऐसे में सैलानियों को यहां तक आने के लिए खासी मशक्कत करना पड़ती है। वहीं प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यहां आने वाले सैलानियों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है।
पांडवों ने बिताया था अज्ञातवास
किवंदति के अनुसार पांडवों ने यहां अज्ञातवास बिताया था। वर्तमान में यहां गुप्तकाल के भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा है। वहीं भगवान बराह की खंडित प्रतिमा, भीम गजा सहित सुंदर नक्कासी का नमूना यहां देखने को मिलेगा। नृसिंह मंदिर के अवशेष आकर्षण का प्रमुख केन्द्र हंै। इन मनमोहक दृश्यों को कई फिल्मों भी दर्शाया जा चुका है। देश के विभिन्न कोनों के साथ ही विदेश से भी सैलानी प्रकृति की सुंदरता को देखने यहां आते हैं। लेकिन खस्ताहाल सड़क के कारण सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वाहन हो जाते हैं खराब
पर्यटन स्थल पहुंचने के लिए बने मुख्य मार्ग की हालत काफी खस्ताहाल होने के कारण यहां आने वाले सैलानियों के वाहन अक्सर खराब हो जाते हैं। जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जनप्रतिनिधि, प्रशासन नहीं दे रहे ध्यान
सैलानियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर तक पहुंचने के लिए व्यवस्था करने की ओर न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी। इस कारण यह मार्ग वर्षों से खस्ताहाल है और इसे सुधारने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है।
10 साल से नहीं हुआ महोत्सव
यहां के एतिहासिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले ने लगभग एक दशक पूर्व मकरसंक्राति पर लगने वाले मेले को ऐरण महोत्सव का रूप दिया था। लेकिन वर्ष 2008 में आखिरी बार ऐरण महोत्सव हुआ। इसके बाद 10 साल होने को हैं यह महोत्सव प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते फिर नहीं हो सका। जबकि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस महोत्सव को और भव्य करने का वादा किया था। लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका।
हजारों ग्रामीण परेशान
खस्ताहाल सड़क के कारण निवोदिया, भरतौली सहित दर्जनों गांवों के लोगों को भी मंडीबामोरा तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐरण तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क में जगह-जगह बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे हो गए हैं। वहीं रास्ते में रेहटी नदी पर पुल नहीं होने के कारण आवागमन भी प्रभावित होता है।
- प्रतापसिंह दरबार, सरपंच, ग्राम पंचायत ऐरण
मंडीबामोरा से ऐरण के सीधे रास्ते पर हरदौट गांव के पास रेहटी नदी पर पुल जर्जर होने के कारण वाहन निकालने में परेशानी होती है। बारिश में कई दिनों तक कुछ गांव टापू बन जाते हंै। उनके चारों तरफ के रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते है। इस ओर प्रशासन और जनप्रतिनिधयों को ध्यान देना चाहिए।
- नीलेश साहू, रहवासी, निवोदिया
Published on:
10 Jul 2018 09:13 am
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