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शिक्षा में पिछड़े जिले के हालात, 84 स्कूल भवन विहीन

कहीं जर्जर भवनों तो कहीं दूसरे के भवनों में चल रहीं कक्षाएं, नीति आयोग की रिपोर्ट में विदिशा जिला देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार है।

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84 स्कूल भवन विहीन

विदिशा. नीति आयोग की रिपोर्ट में विदिशा जिला देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार है। शासन-प्रशासन ने सारी रिपोर्ट खंगाल लीं, लेकिन फिर भी आंखें नहीं खुलीं। हालात हैं कि सुधरते नहीं। जिले में नया शिक्षण सत्र शुरू होकर कक्षाएं लगना शुरू हो गईं हैं, लेकिन आज भी जिले के 85 स्कूल भवन विहीन हैं। बिना भवनों के ये स्कूल कहीं जर्जर भवनों, कहीं रसोई घर, कहीं किसी की दहलान तो कुछ दूसरे स्कूल भवनों में संचालित हो रहे हैं।

विदिशा तहसील के तीन मिडिल स्कूलों आदमपुर, कचनारिया और करारिया के भवन नहीं हैं। गंजबासौदा तहसील की प्राथमिक शाला हरिपुर, रवरियाई, कैथोरी टपरा, नयागांव टपरा, सागौनी, नगरशाला पचमा, सैटेलाइट स्कूल आजाद नगर, काजी किर्रोदा, झिलीपुर और फतेहपुर में भवन नहीं हैं। ग्यारसपुर के मिडिल स्कूल गुनुआ और घटेरा के भवन नहीं हैं। कुरवाई के रूसिया टपरा, मिठौली और रमपुरा में प्राथमिक शाला भवन नहीं हैं। लटेरी के रामटेक कोटरा, चौकीदार का पुरा, कीलनखेड़ी, कुंदनखेड़ी, फिरोजगंज, चंदा बंजारा टपरा, मदनखेड़ी, गांधीनगर, कोलूखेड़ी मोतीपुर, फोजपुर, लक्ष्मणपुरा, खैरुआपुरा, मोहनपुरा, मदनपुरा, रमपुरा, बांसखेड़ा और वास्तु में प्राथमिक शाला भवन नहीं हैं। नटेरन के जामनपुर चक्क और खैरुआपुरा में प्राथमिक शाला भवन नहीं हैं। जबकि सिरोंज के किसनपुरा, दुलाखेड़ी, त्रिभुवनपुर, विशनपुर, हरिजन बस्ती, बंजारा टपरा, इंद्रा कॉलोनी, भैरोघाटी, हरिजन टपरा, भूरी टोरी, इतानपुरा, मुरादपुर, मुजफ्फरगढ़ तथा वामनखेड़ी के प्राथमिक स्कूल भवन विहीन हैं।
इसी तरह विदिशा के माधवगंज क्रमांग-एक, सुनपुरा, सलैया, छीरखेड़ा, भाटनी, खैरूआ हाट, कोठीचारकलां, भदारबड़ागांव, पैरवारा, देहरी, गोबरहेला में हाई और संस्कृत उमावि विदिशा काभवन नहीं है। सिरोंज के भौंरिया, पिपल्याहाट, चितावन के हाई स्कूल और संस्कृत उमावि सिरोंज का भवन नहीं है। नटेरन में डंगरबाड़ा, आमखेड़ा कालू, रमपुरा जागीर, साढेर में हाई स्कूल भवन नहीं है। लटेरी के अलीगढ़ कोटरा, सुनखेर, जावती, दनवास में कुरवाई के सीहोरा तथा लायरा में, गंजबासौदा के फरीदपुर और भिदवासन में और ग्यारसपुर के इंदरवास, झिरनियां, बरखेड़ा गंभीर, मोहनाखेजड़ा और मूडरा गनेशपुर में हाई स्कूल भवन नहीं है।

दुलाखेड़ी: कोई भवन नहीं, पूरी बारिश रहेगी छुट्टी
सिरोंज तहसील के इस दुलाखेड़ी गांव में प्राथमिक शाला के नाम पर कोई भवन नहीं है। यहां बच्चों को कभी किसी की दहलान में पढ़ाने बैठा दिया जाता है तो कभी दहलान के मालिक द्वारा भगा दिए जाने पर पेड़ के नीचे या किसी चबूतरे पर बैठकर पढऩा पड़ता है। कहना न होगा कि बारिश और तेज धूप की स्थिति में यहां के बच्चों की कोई कक्षा नहीं लगती। वर्षों से जानकारी होने के बाद भी जिला शिक्षा केन्द्र यहां भवन नहीं बनवा सका। यहां किसी तरह अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत तो करा लिया, लेकिन यहां के भवन के लिए राशि अब तक नहीं पहुंच सकी है। यानी अब फिर बच्चे ऐसे ही खुले आसमान के नीचें पढ़ेंगे और बारिश भर उनकी छुट्टी रहेगी।

टांडा खोहा: किचिन में लगता स्कूल
शमशाबाद तहसील के इस टांडा खोहा गांव में पुराना प्राथमिक शाला भवन बिल्कुल धराशायी हो चुका है। उसकी छत है ही नहीं, दीवारें भी आधी गिर चुकी हैं। ऐसे में पिछले कई वर्षोंं से मध्याह्न भोजन बनाने वाले किचिन शेड में बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि वहां बने गैस स्टैंड के ऊपर और नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। यहां पत्रिका की खबर के बाद भवन के लिए १० लाख रुपए स्वीकृत हुए थे, लेकिन अब तक काम शुरू भी नहीं हो सका है। ऐसे में इस बार भी बच्चों को किचिन में बैठकर ही पढऩा पड़ेगा।

खोहा: बिना दरवाजे, खिड़की का स्कूल
शमशाबाद तहसील का खोहा गांव बंजारा बाहुल्य है। यहां प्राथमिक शाला भवन बहुत जर्जर स्थिति में है, लेकिन कक्षाएं वहीं लगाना मजबूरी है। भवन में एक भी दरवाजा या खिड़की का फाटक नहीं बचा है। शिक्षक को अपने रजिस्टर या टेबल कुर्सी रखने तक की जगह वहां नहीं है। शिक्षक खड़े-खड़े या टाटफट्टी पर बैठकर ही पढ़ाते हैं। वे अपने स्कूल के दस्तावेज या तो अपने घर पर रखते हैं या फिर गांव में किसी के घर रख आते हैं। पत्रिका की खबर पर इस स्कूल के लिए भी १० लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं, लेकिन अब तक यहां भी काम शुरू नहीं हो सका है।

जिले में ५१ प्राथमिक और माध्यमिक शालाएं भवन विहीन हैं। सभी के प्रस्ताव भवन के लिए भेजे गए हैं। दुलाखेड़ी में अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत हुआ है, टांडा खोहा और खोहा में १०-१० लाख से भवन स्वीकृत हुए हैं, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। -सुशील जायसवाल, सहायक यंत्री, जिला शिक्षा केन्द