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नहीं देखा होगा ऐसा भंडारा- 150 रसोइयों ने बनाया, 1.50 लाख लोगों ने लिया प्रसाद

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित सिरोंज नगर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भर-भरकर सेव, बूंदी, पूड़ी और अन्य प्रसादी परोसी गई.

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विदिशा/सिरोंज. मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित सिरोंज नगर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भर-भरकर सेव, बूंदी, पूड़ी और अन्य प्रसादी परोसी गई, विशाल भंडारे में एक बार में करीब 10 से 12 हजार लोगों ने बैठकर भोजन प्रसादी ली, बताया जा रहा है कि करीब 1.5 लाख से अधिक लोगों ने भंडारे में प्रसादी ली।


150 क्विंटल बूंदी, 125 क्विंटल आटे की पूड़ी बनाई

मां की रसोई में हमेशा बरकत रहती है। तभी तो सिरोंज की अधिष्ठात्री देवी महामाई के आंगन में जब भंडारा हुआ तो न सिर्फ रस बरसा बल्कि बरकत इतनी रही कि देर रात तक हजारों लोग प्रसादी ग्रहण करते रहे। भंडारे में डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों ने भोजन बनाने का काम किया। इसमें करीब डेढ़ सौ क्विंटल बूंदी, सवा सौ क्विंटल आटे की पूड़ी और 6 हजार लीटर दूध की खीर के अलावा सेव और सब्जियां भी बनीं।

महामाई की भोजन शाला का काम देख रहे रविकांत तारण ने बताया कि मां के दरबार में किसी चीज की कमी नहीं पड़ी। करीब एक लाख से ज्यादा लोगों की भोजन प्रसादी का इंतजाम किया था। माई को भोग अर्पित कर शुक्रवार की शाम से भंडारा शुरू हुआ, जिसमें देर रात तक एक-एक बार में दस हजार लोग तक प्रसादी ग्रहण करने बैठते रहे। विधायक उमाकांत शर्मा ने महामाई के दरबार में संतों का पूजन, आरती कर भोजन परोसा और भंडारे की शुरुआत कराई।

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तारण ने बताया कि मंदिर परिसर में विशाल भोजन शाला बनाई गई, जिसमें 15 क्विंटल बेसन के सेव, 5 हजार लीटर मठे का रायता, 6 हजार लीटर दूध की खीर बनाई गई। इसके अलावा 25 क्विंटल आलू और 20 क्विंटल टमाटर की सब्जी के साथ पूड़ी और बूंदी खूब बनी। बूंदी और सेव बनाने का काम 28 मार्च से ही शुरू हो गया था, जबकि पूड़ी बनाने का काम 30 मार्च की शाम से शुरू हुआ, क्योंकि इतनी तादाद में भोजन एक साथ बनना मुमकिन नहीं होता। खीर को ठंडा रखने के लिए बर्फ का भी इंतजाम किया गया था। भोजन शाला से पंगत वाली जगह पर ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से बूंदी, सेव और पूड़ी भरवाकर भिजवाई जा रही थी। सेवादार श्रद्धालुओं को प्रसादी बांट रहे थे। भोजन के लिए 20 गाले बनाए गए थे, जिनमें एक बार में करीब 5-6 हजार लोग भोजन प्रसादी के लिए बैठ रहे थे।