2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस चीज को खरीदने से पहले दस बार दौड़ाते होंगे दिमाग, यहां मिलती है कौड़ियों के भाव

बाजार में 800 से 1000 रूपए प्रतिकिलो बिकने वाला यह ड्राई फ्रूट इस शहर में 30 से 50 रुपये किलो में बिकता है।

2 min read
Google source verification

image

Arijita Sen

Jul 14, 2018

Cashew

इस चीज को खरीदने से पहले दस बार दौड़ाते होंगे दिमाग, यहां मिलती है कौड़ियों के भाव

नई दिल्ली। काजू को ड्राई फ्रूट का बादशाह माना जाता है। यह स्वास्थ्य और सेहत दोनों के लिए ही अच्छा है। काजू लगभग हर किसी को पसंद है।

कुछ लोग इसे भून कर खाना पसंद करते हैं, कुछ मिठाई के रूप में इसे खाते है और कुछ इसका उपयोग लजीज पकवानों को बनाने में करते हैं, लेकिन दिक्कत की बात ये है कि काजू खरीदना और इसका सेवन करना हर किसी के लिए संभव नहीं है क्योंकि बाजार में इसकी कीमत के बारे में आप जानते ही होंगे,लेकिन अपने देश में ही एक ऐसी जगह है जहां काजू खरीदना काफी आम है।

ऐसा इसलिए क्योंकि ड्राई फ्रूट का यह बादशाह यहां कौड़ियों के भाव बिकता है।

जी हां, बाजार में 800 से 1000 रूपए प्रतिकिलो बिकने वाला यह ड्राई फ्रूट इस शहर में 30 से 50 रुपये किलो में बिकता है।हम यहां बात कर रहे हैं झारखण्ड राज्य के जामताड़ा जिले के बारे में जहां लोगों के लिए काजू खरीदना सब्जियां खरीदने के बराबर हैं।

यह सुनकर आपको ऐसा लग सकता है कि शायद ये काजू निम्न क्वालिटी के होंगे, लेकिन आपको बता दें कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यहां बिकने वाले काजू उच्च क्वालिटी के होते हैं। यहां काजू के इतने सस्ते रेट होने के पीछे की वजह यह है कि यहां हर साल हजारों टन काजू पैदा किया जाता है।

बता दें, जामताड़ा जिला मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर 49 एकड़ पर ड्राई फ्रूट का बगीचा फैला हुआ है। यहां इन बागानों में काम करने वाले लोग इन्हें बेहद सस्ते भाव पर बेच देते हैं।

जामताड़ा के लोगों का इस बारे में कहना है कि कुछ साल पहले जामताड़ा के एक्स डिप्टी कमिश्नर कृपानंद झा यहाँ आए थे। उन्होंने ही उड़ीसा के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा यहां भू परिक्षण कराकर काजू की खेती शुरू कराई। यह उन्हीं के प्रयासों का फल है कि यहां काजू की अच्छी पैदावार होती है।देश में ड्राई फ्रूट की बढ़ती कीमत को देखते हुए यहां के लोगों में काजू की खेती के प्रति झुकाव निरन्तर बढ़ रहा है।