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देवाधिदेव महादेव शिव धाम ‘कैलाश’, दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत

कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है

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mansarovar yatra the mystery of shiv dham

देवाधिदेव महादेव शिव धाम 'कैलाश', दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत

नई दिल्ली। कैलाश पर्वत भारत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा रक्षातल झील हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर शिव-शंभु का धाम है। यह स्थान बौद्ध धर्मावलंबियों के सभी तीर्थ स्थानों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। कैलाश पर स्थित बुद्ध भगवान के अलौकिक रूप ‘डेमचौक’ बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए पूजनीय है। वह बुद्ध के इस रूप को ‘धर्मपाल’ की संज्ञा भी देते हैं। मान्यता है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते हैं पर ये नहीं जानते होंगे की वह इस दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत है जो की माना जाता है की अप्राकृतिक शक्तियों का भण्डार है।

कैलाश पर्वत चार महान नदियों के स्त्रोतों से घिरा है सिंध, ब्रह्मपुत्र, सतलज और कर्णाली या घाघरा तथा दो सरोवर इसके आधार हैं पहला मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकर सूर्य के सामान है तथा राक्षस झील जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चंद्र के सामान है।

मानसरोवर झील और राक्षस झील...

राक्षसताल तिब्बत में एक झील है जो मानसरोवर और कैलाश पर्वत के पास, उनसे पश्चिम में स्थित है। सतलुज नदी राक्षसतल के उत्तरी छोर से शुरु होती है। पवित्र मानसरोवर और कैलाश के इतना पास होने के बावजूद राक्षसताल हिन्दुओं और बौद्ध-धर्मियों द्वारा पवित्र या पूजनीय नहीं मानी जाती।

कैलाश पर्वत के चारों ओर होता है अलौकिक शक्ति का प्रवाह...

मानसरोवर झील और राक्षस झील, ये दोनों झीलें सौर और चंद्र बल को प्रदर्शित करते हैं जिसका सम्बन्ध सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा से है। कैलास मानसरोवर हिंदुओं का पवित्र धाम है। शिव शंभू का यह धाम असीमित ऊर्जा का भंडार है। यही वजह है कि यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं में नकारात्मक विचारों का शमन तथा सकारात्मक विचारों का आगमन होने लगता है।

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