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राक्षस से बचाने के लिए अपने नवजातों के हाथ खौलते तेल में डाल रही हैं माएं, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे

हम बात कर रहे हैं 'जमोगा' के बारे में। इस बीमारी के इलाज के लिए माएं अपने बच्चों की उंगलियां खौलते हुए तेल में डाल देती हैं।

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Arijita Sen

Jun 16, 2018

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राक्षस से बचाने के लिए अपने नवजातों के हाथ खौलते तेल में डाल रही हैं माएं, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली। हम जानते हैं कि हमारे देश में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो किसी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना बेहतर नहीं समझते हैं। अपनी शारीरिक और मानसिक समस्या के समाधान के लिए ओझा, तान्त्रिक से झाड़-फूंक करवाते हैं। इससे भले ही उन्हें शारीरिक यातनाओं का सामना करना पड़े लेकिन इन अंधविश्वासों पर लोगों का विश्वास आज भी कायम है।
अब ये अंधविश्वास नहीं तो और क्या है? जहां एक मां खुद अपने बच्चे का हाथ खौलते हुए तेल में डाल देती है। जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं 'जमोगा' नामक बीमारी के बारे में, जो उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर फैली हुई है। खासकर रायबरेली में इसका प्रकोप बहुत ज्यादा है। इस बीमारी के इलाज के लिए माएं अपने बच्चों की उंगलियां खौलते हुए तेल में डाल देती हैं।

अब आप 32 वर्षीय रमा देवी को ही देख लीजिए। रमा देवी ने अपनी दुधमुंही बच्ची शिवपूजन की सबसे छोटी उंगली गरम खौलते तेल में डाल दी। उस दौरान शिवपूजन मात्र डेढ़ महीने की थी। जब वो छह माह की हुई तो रमा ने उसके दूसरे हाथ की सबसे छोटी उंगली भी गर्म तेल में डाल दी। रमा का ऐसा मानना है कि अब जमोगा की बुरी नजर उसकी बेटी पर कभी नहीं पड़ेगी। रमा खुशकिस्मत थी कि उसकी बेटी ने इस दर्द को सहन कर लिया। ज्यादातर मामलों में बच्चे इससे बुरी तरह से घायल हो जाते हैं।

आखिर क्या है जमोगा?

यहां की महिलाओं से जब पूछा गया कि आखिर जमोगा क्या है? उन्हें कैसे पता लगता है कि उनका बच्चा इस बीमारी की चपेट में हैं? इस सवाल पर यहां की औरतों का कहना है कि जब बच्चा घूर के देखने लगता है, जब उसके शरीर का रंग कभी पीला तो कभी नीला हो जाता है, हाथ-पैर सुन्न पड़ जाता है, उल्टियां होने लगती है, दस्त की शिकायत शुरू हो जाती है और इसके साथ ही वे दूध का सेवन ज्यादा करने लगते हैं तो इसका मतलब वो जमोगा से ग्रस्त है। यहां की महिलाओं का ये भी मानना है कि इस बीमारी में डॉक्टर दिखाने का कोई फायदा नहीं है। इसका इलाज केवल गर्म तेल में हाथ डालकर ही संभव है।

असलियत

जमोगा के बारे में जब स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बात की गई तो उनका कहना था कि यह एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है। गर्म तेल में हाथ डालकर इसका उपचार करना सिर्फ अंधविश्वास है।
बता दें इस बीमारी को यूपी में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बुंदेलखंड में इसे बड़कावा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हवा-बयार के नाम से जाना जाता है। यहां के लोगों की नजर में जमोगा एक राक्षस है और खौलते हुए तेल में हाथ डालने से वो भाग जाता है।