4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

5 साल से जंगल में भटक रही थी भेड़, 35 किलो ऊन निकालकर ऐसे बचाई जान

एक ऐसा ही मामला आस्ट्रेलिया से सामने आया है। एक भेड़ 5 साल पहले रास्ता भटक कर खो गई थी। इतने सालों तक वह जंगल में घूमती रही। इस दौरान शरीर पर 35 किलो ऊन जमा हो गई।

2 min read
Google source verification
sheep

sheep

नई दिल्ली। आपने अब तक तो इंसान को रास्ता भटकने की कई कहानियां पढ़ी और सुनी होगी। इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी भी कई बार रास्ता भटक जाते हैं। एक ऐसा ही मामला आस्ट्रेलिया से सामने आया है। यहां एक भेड़ 5 साल पहले रास्ता भटक कर जंगल में खो गई थी। इतने सालों तक वह जंगल में घूमती रही। इस दौरान उसके शरीर पर 35 किलो ऊन जमा हो गई। जब लोगों की नजर इस भेड़ पर पड़ी तो वह हैरान रह गए। उनकी इस मोटी परत के कारण ही वह इतने सालों तक जिंदा रही। आइए जानते यह पूरा मामला क्या है।

35 किलो जमा हो गई थी ऊन
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस भेड़ का नाम बराक बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह भेड़ कम से कम 5 साल तक जंगलों में भटकती रही है। इस दौरान उसके शरीर पर 35 किलो ऊन जमा हो गई है। यह भेड़ एक समूह को विक्‍टोरियन स्‍टेट फॉरेस्‍ट में भटकती मिली थी। हाल ही में उसे वहां से बचाकर एक एनिमल रेस्‍क्‍यू सेंटर पर ले जाया गया। जहां उसका ख्‍याल रख रहे है।

यह भी पढ़े :— मछुआरे को मिली इंसान की शक्ल की शार्क, लोगों में दहशत का माहौल

साल तक नहीं काटी गई ऊन
इस भेड़ के बारे में बात करते हुए एडगर मिशन फार्म सेंचुरी के संस्‍थापक पैम अहर्न ने कहा कि उन्‍हें यकीन नहीं हो रहा है कि इस ऊन के ढेर के नीचे कोई भेड़ असल में जिंदा भी रह सकती है। इस भेड़ के ऊन को कम से कम 5 साल तक नहीं काटा गया है। भेड़ को देखकर ऐसा लगता है कि जब यह छोटी थी, तभी जंगल में भटक गई होगी। उसके बाद इसे वापस आने का रास्‍ता नहीं मिला होगा।

सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
बराक नामक इस भेड़ को बचाने के बाद इसे सेंटर पर लाया गया। वहां इसके ऊन को अलग किया गया। इसके बाद इसके खानपान का पूरा ख्‍याल रखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो शेयर किया गया है। जो लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते है कि भेड़ के पर ऊन की एक मोटी परत जमी हुई है। जिसके कारण वह बहुत ही अजीब नजर आ रही है। इसके बार ऊन को काट लिया जाता है। कपड़ेे से उसके शरीर को ढ़क देते है। साथ ही उनका विशेष ध्यान रखा जाता रहा है।