
इन गद्दारों ने अपने स्वार्थ के लिए की थी देश के साथ गद्दारी, इन्हीं के चलते लूट गई सोने की चिड़िया
नई दिल्ली। भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विविधताओं और संस्कृति के चलते दुनिया भर में मशहूर है। हालांकि एक वक्त ऐसा भी था जब हिंदूस्तान को लोग सोने की चिड़िया के नाम से भी जानते थे।
आज जहां भारत एक विकासशील देश है। देश में अभी भी ऐसे बहुत से परिवार है जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करते हैं। जबकि एक जमाने में भारत में धन दौलत की कोई कमी नहीं थी।
सोने-चांदी, हीरे-जवाहरातों से लैस था हमारा देश, लेकिन कुछ गद्दारों के चलते अंग्रेजो को भारत में लूट मचाने में सुविधा मिली।
आज हम आपको इतिहास के इन्हीं कुछ गद्दारों के बारे में बताएंगे जिनके चलते अंग्रेज हमारी सोने की चिड़िया को लूट कर ले गए।
इनमें सबसे पहले नाम आता है राजा जयचंद ? का। पृथ्वीराज चौहान के बारे में हम सभी ने सुना है। देश के महान राजाओं में से एक थे पृथ्वीराज चौहान। उनके शासनकाल में मौहम्मद गौरी ने कई बार आक्रमण किए, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।कन्नौज के राजा जयचंद हमेशा से ही पृथ्वीराज से अपनी बेइज्जती का बदला लेना चाहते थे। इसी के चलते जयचंद ने मोहम्मद गौरी के साथ मिलकर एक साजिश रची। परिणामस्वरूप 1192 के तराईन की लड़ाई में मोहम्मद गौरी को विजय प्राप्त हुई।
अब बात करते हैं मीर सादिक के बारे में। मीर सादिक भारत के महान योद्धा टीपू सुलतान के खास मंत्रियों में से एक था।अंग्रेजों के साथ मिलकर उनका अपना मीर सादिक उनकी ही पीठ पर छूरा घोंपा। मीर सादिक के मदद के चलते ही 1779 के युद्ध में अग्रेजों ने उन्हें हरा दिया।
मीर कासिम का भी नाम आपने सुना ही होगा। अंग्रेजों ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हटाने के लिए मीर जाफर का इस्तेमाल किया और बाद में मीर जाफर अपने रास्ते से हटाने के लिए मीर कासिम का का उपयोग किया। हालांकि कासिम को बाद में अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने अपना सब कुछ गवा दिया था।
1757 के प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला को हराने के लिए मीर जाफर ने भी अंग्रेजों की मदद ली। अगर शायद मीर जाफर न होता तो शायद हम अंग्रेजों के गुलाम भी नहीं बन पाते।
Updated on:
25 Aug 2018 02:48 pm
Published on:
25 Aug 2018 02:19 pm
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