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Nepal Flood: सुरंगों में मिट्टी-मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश, परिजनों ने कहा- ‘हमें अब भी उम्मीद’

Nepal Flood Rescue Operation: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में मौतों का आंकड़ा 1,093 पहुंच गया है, जबकि 4,462 लोग अब भी लापता हैं। सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी है।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 2 Sep 2026, 7:18 AM IST

search and rescue operations in nepal.

नेपाल में राहत बचाव दल सुरंगों में जमा मिट्टी, पत्थर और मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रहे। (Photo- ANI)

Nepal flash floods: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति विकट बनी हुई है। एक तरफ जहां बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,093 हो गई है, वहीं 4662 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले उन मजदूरों को लेकर है, जिनका बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल सका है। राहत बचाव दल सुरंगों में जमा मिट्टी, पत्थर और मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। वहीं, परिजन कई दिनों से अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन से अभियान तेज करने की मांग कर रहे हैं।

आखिरी बार सुबह हुई थी पिता से बात

रासुवा जिले की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 60 वर्षीय लक्ष्मण गुरूंग भी लापता हैं। उनके 20 वर्षीय बेटे अनुश ने बताया कि उसने 26 अगस्त की सुबह करीब 8 बजे अपने पिता से आखिरी बार बात की थी। इसके कुछ ही देर बाद इलाके में अचानक बाढ़ आ गई। लक्ष्मण का कोई पता नहीं चला। लक्ष्मण के साथ काम करने वाले कर्मचारियों से परिवार को अलग-अलग जानकारी मिली है।

कुछ लोगों का कहना है कि बाढ़ आने के समय लक्ष्मण सुरंग के अंदर थे। परिवार अब सुरंग की पूरी तरह तलाशी लिए जाने का इंतजार कर रहा है। अनुश ने कहा कि अगर सुरंग की तलाशी ली जाए तो स्थिति साफ हो सकती है। परिवार को अब भी उम्मीद है कि शायद उनके पिता सुरंग के अंदर सुरक्षित हों।

बाढ़ की भयावहता के बीच लापता मजदूरों के परिवारों की उम्मीद अभी भी कायम है। परिजन चाहते हैं कि सुरंगों से मलबा जल्द हटाया जाए, ताकि उन्हें अपने अपनों के बारे में कोई पक्की जानकारी मिल सके।

122 से ज्यादा लोग अब भी लापता

नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3बी परियोजना में भी बड़ी संख्या में मजदूरों के लापता होने की खबर है। यहां 58 वर्षीय कमल बहादुर पांडे की तलाश उनके बेटे बिवेक कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना से कम से कम 122 लोग अब तक लापता हैं।

लापता मजदूरों के परिजन बिदुर स्थित सेना के राहत एवं बचाव केंद्र पहुंचे। परिजनों ने अधिकारियों से तलाशी अभियान तेज करने की मांग की। कई दिनों के दबाव के बाद घटनास्थल पर खुदाई के लिए एक्स्केवेटर पहुंचाया गया है।

मलबे से भरी सुरंगों में रेस्क्यू चुनौतीपूर्ण

नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत के अनुसार, कई जलविद्युत परियोजनाओं में विदेशी विशेषज्ञों की मदद से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरंगों के भीतर भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें जमा हैं, जिससे बचाव दल को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। भारत की टनल रेस्क्यू टीम भी रासुवा जिले के चिलिमे में नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान चला रही है। खराब सड़कें, दुर्गम पहाड़ी इलाका और क्षतिग्रस्त रास्ते भी बचाव कार्य में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

12 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान

नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अध्यक्ष मोहन कुमार दांगी के मुताबिक, रासुवा और नुवाकोट में कम से कम 12 जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। इनकी कुल क्षमता 670 मेगावाट है। इनमें चार परियोजनाएं निर्माणाधीन, सात चालू और एक परीक्षण चरण में थी।

भारत के 403 लोग भी लापता

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 275 भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग अभी भी लापता हैं। हालांकि, सोमवार रात तक 158 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका था। भारत ने बचाव अभियान में विशेषज्ञ टीमें और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी भेजे हैं। बचाव दल का कहना है कि सुरंगों और भूमिगत पावरहाउस में हवा के छोटे हिस्से बचे होने की संभावना अभी भी है। हालांकि, ऑक्सीजन, भोजन और पानी की कमी के कारण हर गुजरता घंटा बेहद अहम होता जा रहा है।