
नेपाल में बाढ़ के बाद की तस्वीर (Photo-IANS)
Nepal Flood News: हिमालयी क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्लेशियरों से जुड़ी विनाशकारी बाढ़ का सामना कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि इस खतरे का असर सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नदियों के किनारे बसे लाखों लोगों की जिंदगी और जरूरी ढांचे पर भी पड़ सकता है। कई इलाकों में हालात ऐसे हो सकते हैं कि जहां आज लोग रह रहे हैं, वहां भविष्य में रहना बेहद मुश्किल हो जाए।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,000 से ज्यादा हो गई है। इस आपदा की शुरुआत एक ग्लेशियर के हिस्से के टूटकर नीचे गिरने से हुई।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी यूएनडीपी की एशिया और प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक कन्नी विग्नाराजा ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि हिमालयी नदियों के आसपास रहने वाली आबादी पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, नए आंकड़ों से पता चलता है कि जोखिम में आने वाली आबादी की संख्या लाखों में है।
विग्नाराजा ने कहा कि इन विशाल नदी प्रणालियों में ग्लेशियर की झीलों से आने वाले पानी को रोकने के लिए तकनीक अभी इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ी है कि बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को पूरी तरह रोका जा सके।
इसका मतलब है कि बाढ़ का खतरा सिर्फ जान-माल तक सीमित नहीं है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में सुरक्षित जगहों पर जाना भी जरूरी हो सकता है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ऊंचे और सुरक्षित इलाकों में बसना आसान नहीं होगा।
नेपाल में पिछले हफ्ते हुई तबाही ने इस खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रख दी। लैंगटांग लिरुंग पर्वत के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा था। इससे बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ और पानी की तेज लहर त्रिशूली नदी की ओर बढ़ गई।
ग्लेशियर से जुड़ी हर बाढ़ एक जैसी नहीं होती। कई बार ग्लेशियर के पिघलने से पानी किसी प्राकृतिक बांध के पीछे जमा होता रहता है। पानी का दबाव बढ़ने पर यह बांध टूट सकता है या पानी उसके ऊपर से बह सकता है। इसके बाद अचानक आई बाढ़ नीचे के इलाकों को अपनी चपेट में ले सकती है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे पहाड़ों की चट्टानें कमजोर हो रही हैं और ग्लेशियर झीलों को रोकने वाले प्राकृतिक बांधों पर दबाव बढ़ रहा है।
2020 में शोधकर्ताओं ने नेपाल, चीन और भारत में 47 ऐसी ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया था। इसके बाद किए गए आकलनों में ऐसी झीलों की संख्या इससे काफी ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है।
हिमालय की भौगोलिक स्थिति भी खतरे को बढ़ाती है। विग्नाराजा ने बताया कि इस क्षेत्र के पहाड़ अपेक्षाकृत नए हैं और यहां जमीन के अंदर होने वाली हलचल भी अचानक ग्लेशियर या झीलों के प्राकृतिक बांध टूटने की वजह बन सकती है।
नेपाल की अर्थव्यवस्था और बिजली उत्पादन में ग्लेशियरों व नदियों की बड़ी भूमिका है। इसलिए ग्लेशियरों से आने वाली बाढ़ का असर वहां पानी की आपूर्ति के साथ-साथ बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
यूएनडीपी के अनुसार, पिछले हफ्ते की बाढ़ से निर्माणाधीन 15 बड़े बिजली संयंत्र भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा पहले से चल रहे बिजली संयंत्रों को भी नुकसान पहुंचा है।
Updated on:
01 Sept 2026 08:27 pm
Published on:
01 Sept 2026 08:27 pm
