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Nepal Flood: कई बार चेतावनी के बावजूद नहीं रुका काम, नुकसान इतना बड़ा कि अब नेपाल को भारत से खरीदनी पड़ेगी बिजली

Nepal Flood News: नेपाल में बाढ़ से 11 जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गईं हैं। बालेन शाह सरकार अब घरेलू जरूरत के लिए भारत से बिजली खरीदने की तैयारी में हैं।
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भारत

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Mukul Kumar

Sep 01, 2026

Nepal Flood News

नेपाल में बाढ़ से बुरा हाल। (फोटो- IANS)

Nepal Flood Update: नेपाल के बागमती प्रांत में पिछले हफ्ते आई बाढ़ ने सिर्फ गांव ही नहीं बहाए, कई बिजली प्लांट को भी पूरी तरह तबाह कर दिया। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अब तक इन प्लांट्स में काम करने वाले या आसपास रहने वाले करीब 900 लोग लापता हैं।

इस बाढ़ से ग्यारह परियोजनाएं प्रभावित हुईं हैं। कुछ चालू थीं, कुछ निर्माणाधीन। यह नुकसान छोटा नहीं है। नेपाल की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग दस फीसदी यानी 431 मेगावाट प्रभावित हो चुका है।

भारत से खरीदनी पड़ेगी बिजली

नेपाल में बिजली की लगभग सारी जरूरत इन्हीं जलविद्युत से पूरी होती है। इसलिए यह झटका सीधे घरों, दुकानों और उद्योगों तक पहुंचा है। अब नेपाल ने बिजली निर्यात रोक दिया है। घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए भारत से बिजली खरीदनी पड़ेगी।

ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता मोहन कुमार शाक्य ने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है। कितना समय लगेगा, यह रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।

क्यों बार-बार यही इलाके खतरे में?

विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे। नेपाल की ज्यादातर जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ संभावित घाटियों और नदी तल में बनी हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, बर्फ की रेखा ऊपर खिसक रही है। फिर भी निर्माण जारी रहा। जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी रिपोर्ट के लेखक अंजुल प्रकाश ने कहा कि पहाड़ एक दशक से संकेत दे रहे थे। फिर भी प्लांट बनते रहे।

आर्थिक नुकसान भी बड़ा

जलविद्युत निर्यात नेपाल के लिए आय का अच्छा स्रोत बन चुका था। पिछले दस साल में यह औसतन 75 प्रतिशत बढ़ा। पिछले साल कुल निर्यात का करीब दसवां हिस्सा बिजली से आया। अब यह स्रोत अस्थायी रूप से बंद है।

अडानी ग्रुप, एनएचपीसी और जीएमआर जैसी कंपनियां नेपाल में क्षमता तीन गुना बढ़ाने की योजना में शामिल थीं। मकसद भारत को साफ बिजली बेचना था। लेकिन बाढ़ ने इन योजनाओं पर पानी फेर दिया।

दूसरा विकल्प कमजोर

नेपाल के पास कोयला या गैस से बिजली बनाने की बड़ी क्षमता नहीं है। सौर और पवन ऊर्जा की संभावना भी सीमित है। इसलिए नदियों पर निर्भरता बनी हुई है।

रॉयटर्स ने विशेषज्ञ विक्टर वान्या के हवाले से बताया कि अगर नदियों का विकास न किया जाए तो बड़े पैमाने पर बिजली का दूसरा व्यावहारिक रास्ता क्या है? बाढ़ इतनी तेज थी कि पारंपरिक चेतावनी व्यवस्था काम नहीं कर पाई।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र के विशेषज्ञ फारूक आजम ने बताया कि अब बुनियादी ढांचे की योजना बनाते समय बदलते पहाड़ी माहौल को ध्यान में रखना जरूरी है।