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ट्रंप का सीक्रेट मिशन मादुरो: अभेद्य किले से अमेरिकी हिरासत तक, कैसे टूटा सुरक्षा का खुफिया घेरा ?

Nicolas Maduro arrest:अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में घुसकर आखिर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कैसे गिरफ्तार कर लिया। जानें कैसे अभेद्य सुरक्षा के बावजूद ट्रंप का यह मिशन सफल हुआ।

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भारत

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MI Zahir

Jan 05, 2026

US President Donald trump and Venezuela’s President nicolas maduro

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo Credit - IANS/ANI)

Delta Force raid 2026: अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप से पंगा लेने के कारण वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो(Trump Maduro Mission) को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने 3 जनवरी 2026 को काराकस में एक साहसिक ऑपरेशन में पकड़ लिया। यह घटना दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई है। मादुरो लंबे समय से कड़े सुरक्षा घेरे में थे,यहां तक कि उनके सीक्रेट बंकर में 24 घंटे 2,000 स्पेशल कमांडो तैनात रहते थे। यहां तक की बेडरूम में हवा भी चेक हो कर जाती थी, लेकिन अमेरिकी सेना की डेल्टा फोर्स रेड (Delta Force raid 2026) ने काराकस के सबसे सुरक्षित मिलिट्री बेस 'फोर्ट तिउना' में घुसकर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। इस मिशन (Trump Maduro Mission) के लिए महीनों से अमेरिका में मादुरो के घर का डमी मॉडल बनाकर प्रैक्टिस की गई थी। अब न्यूयॉर्क में अमेरिकी अदालत के सामने पेश होने वाले हैं। आइए जानते हैं कि इतनी मजबूत सुरक्षा के बावजूद यह कैसे संभव हुआ।

मादुरो की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी ?

मादुरो की सुरक्षा किसी सामान्य नेता से बहुत अलग थी। वे हमेशा अपनी जान को खतरा महसूस करते थे, इसलिए उनकी हिफाजत के लिए हजारों चुनिंदा सैनिक तैनात रहते थे। इनमें वेनेजुएला की सेना, वायुसेना और नौसेना के सबसे वफादार और कुशल जवान शामिल थे। उनकी सुरक्षा में तीन घेरे थे:

बाहरी घेरा: जहां सैन्य पुलिस और नेशनल गार्ड दूर-दूर तक किसी संदिग्ध गतिविधि को रोकते थे।

मध्य घेरा: स्नाइपर्स, बम निरोधक टीम और एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती।
आंतरिक घेरा: मादुरो का सबसे करीबी सुरक्षा दस्ता, जिसमें क्यूबाई खुफिया एजेंटों की बड़ी भूमिका थी। मादुरो को अपने देश के सैनिकों से ज्यादा क्यूबाई एजेंटों पर भरोसा था।

इसके अलावा, मादुरो पैरानॉइड थे। वे एक ही जगह पर लगातार नहीं रुकते थे, अलग-अलग सुरक्षित ठिकानों और भूमिगत आश्रयों में सोते थे। स्मार्टफोन का इस्तेमाल छोड़ दिया था और केवल एक बार इस्तेमाल होने वाले फोन से बात करते थे।

मिशन की कुछ खास बातें जो सुर्खियों में हैं:

डमी हाउस का अभ्यास: रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने केंटकी (Kentucky) में मादुरो के सुरक्षित घर का बिल्कुल सटीक डमी मॉडल बनाया था, जहाँ हफ्तों तक दरवाजे तोड़ने और तेजी से अंदर घुसने का अभ्यास किया गया।

ब्लोटॉर्च और स्टील के दरवाजे: ट्रंप ने खुद खुलासा किया कि अमेरिकी कमांडो 'मैसिव ब्लोटॉर्च' (विशाल मशालें) लेकर गए थे ताकि अगर मादुरो अपने स्टील के बंकर में बंद हो जाएं, तो उसे काटा जा सके। हालांकि, मादुरो को दरवाजा बंद करने का मौका ही नहीं मिला।

साइबर अटैक: हमले से ठीक पहले काराकस में बिजली काट दी गई थी ताकि अमेरिकी हेलीकॉप्टर रडार की नजर में आए बिना शहर में घुस सकें।

अमेरिकी ऑपरेशन कैसे सफल हुआ ?

3 जनवरी 2026 की सुबह तड़के अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' शुरू किया। पहले हवाई हमलों से वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट किया गया। फिर डेल्टा फोर्स जैसी एलीट यूनिट्स ने काराकस के फोर्ट तिउना मिलिट्री कंपाउंड पर छापा मारा, जहां मादुरो सो
रहे थे।

मादुरो ने सुरक्षित कमरे में भागने की कोशिश भी की

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कमांडो उनके बेडरूम तक पहुंच गए। मादुरो सुरक्षित कमरे में भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा बंद नहीं कर पाए। कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं हुआ और एक भी गोली नहीं चली। मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को आसानी से हिरासत में ले लिया गया।

सुरक्षा घेरा टूटने की असली वजह क्या थी ?

विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो का सुरक्षा तंत्र अंदर से कमजोर हो चुका था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सूत्रों ने महीनों उनकी लोकेशन ट्रैक की थी। अंदरूनी गद्दारी की वजह से कमांडो को रास्ता मिल गया। हजारों सैनिकों और क्यूबाई एजेंटों के रहते हुए चुप्पी यह संकेत देती है कि वफादारी खत्म हो चुकी थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हमलों में क्यूबाई सुरक्षा कर्मी भी मारे गए।

मादुरो और वेनेजुएला : अब आगे क्या होगा ?

मादुरो कपल को अमेरिका ले जाया गया है, जहां उन पर ड्रग तस्करी, नार्को-टेररिज्म और हथियारों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। 5 जनवरी को न्यूयॉर्क की अदालत में पेशी होगी। वेनेजुएला में अंतरिम व्यवस्था चल रही है, लेकिन देश में अनिश्चितता बनी हुई है।

मादुरो का 'अभेद्य किला' आखिरकार ढह गया

बहरहाल, यह घटना दिखाती है कि कितनी भी मजबूत सुरक्षा क्यों न हो, अंदरूनी कमजोरी और उन्नत खुफिया जानकारी सब कुछ बदल सकती है। मादुरो का 'अभेद्य किला' आखिरकार ढह गया, और अब दुनिया देख रही है कि आगे क्या होता है।