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सूर्य का चक्कर लगाए बिना आकाशगंगा में भटक रहा एक ग्रह, न तो सूर्य से बंधा, न ही किसी अन्य तारे से

खगोल वैज्ञानिकों ने एक नए ग्रह की खोज की है। उन्होंने कहा कि यह ग्रह न तो सूर्य से बंधा है, न ही किसी अन्य तारे से। उन्होंने इस ग्रह को आवारा ग्रह की संज्ञा दी है।

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आकाशगंगा (फोटो-AI)

कल्पना कीजिए एक ऐसा ग्रह, जो सूरज की गर्माहट नहीं पाता, किसी तारे की परिक्रमा नहीं करता और फिर भी हमारी आकाशगंगा में चुपचाप यात्रा कर रहा है। खगोलविदों ने हाल ही में ऐसे ही एक ग्रह की खोज की है। यह न तो सूर्य से बंधा है और न ही किसी अन्य तारे से। यह पूरी तरह अकेला भटक रहा है। इन्हें फ्री फ्लोटिंग प्लेनेट या आवारा ग्रह कहा जाता है।

जब यह अदृश्य ग्रह धरती और एक दूर स्थित तारे के बीच से गुजरा, तो इसके गुरुत्वाकर्षण ने उस तारे के प्रकाश को कुछ घंटों के लिए बढ़ा दिया। यह चमक बहुत ही थोड़े समय के लिए थी। इससे वैज्ञानिकों को तुरंत शक हुआ कि इसके पीछे कोई तारा नहीं, बल्कि एक छोटे द्रव्यमान वाला ग्रह है।

प्लेनेट सिस्टम से बाहर फेंके गए

वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि इस ग्रह का द्रव्यमान धरती के आसपास ही है। ऐसे ग्रह अपने जन्म के शुरुआती दिनों में ही अपने प्लेनेट सिस्टम से बाहर फेंक दिए जाते हैं। जब नए ग्रह एक-दूसरे के बहुत करीब बनते हैं, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण का खेल इतना तीव्र हो सकता है कि कोई एक ग्रह अपने तारे की पकड़ से छूट जाए। इसके बाद वह आकाशगंगा में अकेले भटकता रहता है।

लाखों भटकते ग्रह हो सकते हैं

खगोलविदों का मानना है कि हमारी आकाशगंगा में ऐसे लाखों या करोड़ों ग्रह भटक रहे हो सकते हैं। अब तक ज्यादातर अनुमान गैस वाले ग्रहों तक सीमित थे, लेकिन यह खोज बताती है कि छोटे, चट्टानी ग्रह भी अकेले अंतरिक्ष में मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इन्हें ढूंढना आसान नहीं है क्योंकि इनमें प्रकाश नहीं होता।