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अमेरिका के बाद इटली ने अपने नागरिकों से माली न जाने की अपील की, जानें वजह

माली में फ्यूल ब्लॉकेड है। इसके कारण हालात तनावपूर्ण है। जानिए इसके पीछे क्या है अलकायदा से कनेक्शन...

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अफ्रीकी देश माली का झंडा

अफ्रीकी देश माली का झंडा (फोटो-IANS)

अमेरिका (America) के बाद इटली (Italy) की सरकार ने अपने देश के नागरिकों माली (Mali) न जाने की सलाह दी है। इटली के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इतालवी नागरिक जो अभी माली में मौजूद हैं, जल्द से जल्द वहां से निकल जाए। जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों ने भी अपने-अपने नागरिकों को माली छोड़ने की अपील की।

अलकायदा से जुड़े संगठन ने किया फ्यूल ब्लॉकेड

माली में अलकायदा से जुड़े मिलिशिया संगठन नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमिन ने फ्यूल ब्लॉकेड किया है। माली के ग्रामीण इलाकों को कंट्रोल करने वाले आतंकी संगठन JNIM ने 3 सितंबर से ब्लॉकेड लगाया हुआ है। NIM लीडर अबू हौजेफा अल बंबारी ने कहा कि वह ईंधन का एक बूंद भी माली में नहीं आने देंगे। बंबारी के लोगों ने माली के दो शहरों कायेस और निओरा में फ्यूल ब्लॉकेड लगाया है। साथ ही, राजधानी बमाको तक फ्यूल लेकर जाने वाली हर काफिले को निशाना बना रहे हैं।

बंबारी के लोगों ने क्यों किया फ्यूल ब्लॉकेड

माली की मिलिट्री की सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फ्यूल की बिक्री पर बैन लगा दिया है। इससे उन इलाकों में ईंधन की किल्लत हो गई है। यहां मिलिशिया संगठन का राज चलता है। इसके कारण बंबारी के लोगों ने सेनेगल के बॉर्डर पर माली के दो शहरों कायेस और निओरो पर फ्यूल ब्लॉकेड लगाया है, और राजधानी बमाको में फ्यूल पहुंचाने की कोशिश कर रहे काफिलों को भी निशाना बनाया है।

चारों तरफ से लैंडलॉक्ड देश है माली

पश्चिम अफ्रीका में बसा माली एक लैंडलॉक्ड देश है। जिसकी सीमाएं अल्जीरिया, नाइजर, बुर्किना फासो, कोटे डी आइवर, गिनी, सेनेगल और मॉरिटानिया से मिलती हैं। सितंबर में अल कायदा से जुड़े मिलिटेंट ग्रुप जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमिन द्वारा फ्यूल ब्लॉकेड की घोषणा के बाद माली एक अभूतपूर्व संकट की चपेट में है।