24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एयर इंडिया के बम विस्फोट मामले का दोषी जेल से रिहा

एयर इंडिया के कनिष्क में 1985 में हुए विस्फोटों के एकमात्र दोषी इंद्रजीत सिंह रेयत को कनाडा की जेल से रिहा कर दिया गया है। गौरतलब है कि उस समय विस्फोट में विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे।

2 min read
Google source verification

image

kamlesh sharma

Jan 28, 2016

एयर इंडिया के कनिष्क में 1985 में हुए विस्फोटों के एकमात्र दोषी इंद्रजीत सिंह रेयत को कनाडा की जेल से रिहा कर दिया गया है। गौरतलब है कि उस समय विस्फोट में विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे।

वर्ष 2003 में रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागरी की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने झूठ बोलने के लिए रेयत को 2010 में झूठी गवाही देने का दोषी करार दिया था। एयर इंडिया का यह विमान मांट्रियल, कनाडा से लंदन, ब्रिटेन फिर भारत के रास्ते पर था।

आयरलैंड में हुआ पहला विस्फोट
पंजाब से यहां आए पेशे से मैकेनिक रेयत ने डायनामाइट, डिटोनेटर्स और बैटरियां खरीदी थीं। इन्हीं की मदद से किए गए विस्फोटों में एयर इंडिया की उड़ान 182 के 329 यात्रियों की जान चली गई थी।

विमान जब लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे की ओर जा रहा था, उसी दौरान पहला विस्फोट आयरलैंड के तट पर हुआ। दूसरा विस्फोट जापान के नरीता हवाई अड्डे पर हुआ जिसमें सामान उठाने वाले दो कर्मचारी मारे गए थे। 10 साल की मिली सजा वर्ष 1991 में रेयत को सामान उठाने वाले दो कर्मचारियों की मौत के मामले में दोषी करार दिया गया। उसे इस अपराध के लिए 10 साल की सजा दी गई।

एयर इंडिया विमान विस्फोट मामले में उसे नरसंहार के एक अन्य आरोप में पांच वर्ष की सजा दी गई। रेयत को झूठी गवाही देने के लिए नौ साल की सजा मिली। यह अभी तक कनाडा में दी गई ऐसी सबसे लंबी सजा है। हालांकि सुनवाई के दौरान रेयत द्वारा जेल में गुजारे गए वक्त को इसमें जोड़ा गया। उसकी सजा सात जनवरी 2011 से शुरू हुई।

नहीं था विकल्प
पैरोल बोर्ड कनाडा के पेसिफिक क्षेत्रीय प्रबंधक पैट्रिक स्टोरे ने बताया कि रेयत की रिहाई का वक्त आ गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्टोरे वैधानिक रिहाई विवेकाधीन रिहाई नहीं है। यह कानून के अनुसार स्वत: रिहाई है। उसकी वैधानिक रिहाई की तारीख 27 जनवरी, 2016 है और उसकी सजा छह अगस्त, 2018 को समाप्त हो रही है। स्टोरे ने कहा कि पैरोल बोर्ड के पास उसे रिहा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था और कोई सुनवाई नहीं हुई।

करना होगा शर्तों का पालन
रेयत को पेरोल बोर्ड द्वारा तय आठ शर्तों का पालन करना होगा जैसे वह पीडि़त परिवारों से या पूर्व सह-षडयंत्रकारियों से कोई संपर्क नहीं करेगा और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होगा। साथ ही, वह अपने घर नहीं जा सकेगा बल्कि उसे सुधार गृह में रहना होगा।