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अमेरिका में 6 कंपनियों का 90 प्रतिशत मीडिया पर कब्जा, ट्रंप के नए फैसले से बढ़ा विवाद, 70 साल में पहली बार होगा ऐसा

अमेरिका में सिर्फ 6 कंपनियों का 90 प्रतिशत मीडिया पर कब्जा। एफसीसी ने 70 साल बाद टीवी स्टेशन की सीमा बढ़ाई।
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भारत

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Mukul Kumar

Aug 07, 2026

Donald Trump on US Birthright Citizenship.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप (Photo- ANI)

अमेरिका में मीडिया की आजादी पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संघीय संचार आयोग यानी एफसीसी ने गुरुवार को एक ऐसा फैसला लिया है जो पिछले लगभग 70 साल में पहली बार हुआ है। अब कोई भी एक कंपनी पूरे देश के एक तिहाई से ज्यादा घरों तक अपनी टीवी स्टेशन पहुंचा सकती है।

पहले यह सीमा सिर्फ 39 प्रतिशत की थी। वो सीमा अब हटा दी गई है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के दौरान आया है। हालांकि, इससे पहले ही कई बड़ी कंपनियां मीडिया पर मजबूत पकड़ जमाए बैठी हैं।

सिर्फ 6 कंपनियां पूरे टीवी जगत पर हावी

आंकड़ों के मुताबिक, आज महज छह कंपनियां अमेरिकी मीडिया बाजार के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर काबिज हैं। कॉमकास्ट, डिज्नी, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी, पैरामाउंट स्काइडांस और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियां टीवी, फिल्म, स्ट्रीमिंग और समाचार तक का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।

नए फैसले से क्या बदलेगा?

पहले कोई कंपनी इतनी बड़ी नहीं बन सकती थी कि वह देश के ज्यादातर इलाकों में अपनी टीवी चैनल चला सके। अब केस-बाय-केस आधार पर अनुमति दी जाएगी। अब आलोचकों का कहना है कि इससे कुछ चुनिंदा कंपनियां और ताकतवर हो जाएंगी।

पहले नेक्सस्टार और टेग्ना के विलय को मंजूरी दी जा चुकी थी। उसमें एक कंपनी आधे से ज्यादा घरों तक पहुंच गई थी। अब नियम ही बदल दिए गए हैं तो और कंपनियां भी आगे बढ़ सकती हैं।

ट्रंप समर्थकों ने फैसले को बताया सही

ट्रंप समर्थक इस फैसले को ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि आज के डिजिटल जमाने में स्थानीय टीवी स्टेशनों को बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से मुकाबला करने के लिए आकार बढ़ाने की जरूरत है। एफसीसी चेयर ब्रेंडन कार ने भी यही तर्क दिया कि पुरानी सीमा अब काम नहीं आती।

विवाद क्यों बढ़ रहा है?

दूसरी तरफ विपक्षी इसको लेकर चेतावनी दे रही हैं। उनका मानना है कि मीडिया का इतना ज्यादा एक जगह जमा होना लोकतंत्र के लिए खतरा है। जब कुछ कंपनियां ही ज्यादातर खबरें और कार्यक्रम तय करेंगी तो अलग-अलग राय कम हो जाएंगी।

विपक्ष का तर्क है कि पहले भी मीडिया में एकाधिकार की शिकायतें चलती रही हैं। 1980 के दशक में 50 कंपनियां 90 प्रतिशत बाजार संभालती थीं। अब संख्या घटकर आधे दर्जन के करीब रह गई है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिकी घरों में टीवी अभी भी बड़ी भूमिका निभाता है। स्थानीय स्टेशन मौसम, सड़क हादसों और इलाके की खबरें पहुंचाते हैं। अगर एक-दो कंपनियां ही पूरे देश में छा जाएं तो खबरों का रंग-ढंग एक जैसा हो सकता है।