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पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये की आज नई डिफेंस डील, क्या आकार ले रहा है ‘मुस्लिम NATO’?

Muslim NATO को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये 7 अगस्त को जेद्दा में नई रक्षा संधि पर हस्ताक्षर करेंगे। बताया जा रहा है कि इस समझौते का मकसद सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। जानिए 'Muslim NATO' की चर्चा कैसे शुरू हुई, इस सैन्य साझेदारी का उद्देश्य क्या है और पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इसे क्यों अहम माना जा रहा है।
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Saudi Arabia, Turkey and Pakistan Defense Deal

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये नई रक्षा संधि पर समझौते करने जा रहे हैं। (Photo- IANS)

Pakistan Saudi Arabia Turkey Defense Pact: अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कुछ मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं। ऐसे में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये शुक्रवार, 7 अगस्त को जेद्दा में एक नई रक्षा संधि (डिफेंस डील) पर हस्ताक्षर करेंगे। इसकी जानकारी रॉयटर्स के हवाले से दी गई है। इन देशों की नई रक्षा संधि को 'मुस्लिम NATO' का नाम भी दिया जा रहा है। ये तीनों देश ऐसे समय एक साथ आए हैं, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इसकी वजह से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों का आवागमन भी प्रभावित हुआ है।

जेद्दा पहुंचे आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सऊदी अरब के जेद्दा पहुंच चुके हैं। यहां सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की मुलाकात होगी। हालांकि, खबर है कि तुर्किये के राष्ट्रपति अभी तक सऊदी अरब नहीं पहुंचे हैं। उनके निर्धारित समय पर पहुंचने की संभावना है।

कैसे शुरू हुआ 'मुस्लिम NATO' का जिक्र?

दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में बदली हुई भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर 2025 में 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत यदि एक देश पर हमला होता है, तो उसे दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। इसके बाद दोनों देशों ने अन्य मुस्लिम देशों को भी इस सैन्य समझौते में शामिल होने का न्योता देना शुरू किया।

इसी दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि यदि अधिक से अधिक मुस्लिम देश इस तरह के सैन्य संगठन में शामिल होते हैं, तो यह निश्चित रूप से एक नए NATO जैसा प्रभावी गठबंधन बन सकता है।

गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये इस सैन्य गठबंधन का विस्तार करने की कोशिशों में जुटे हुए थे। तभी से अटकलें लगाई जा रही थीं कि जल्द ही इन तीनों देशों के बीच औपचारिक सैन्य गठबंधन हो सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान की रक्षा संधि ने इसलिए भी विशेष ध्यान आकर्षित किया था, क्योंकि पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस दुनिया का इकलौता मुस्लिम-बहुल देश है।